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विश्व हिन्दी दिवस:६ महाद्वीप व १० देशों के विद्वानों ने की सहभागिता

नारनौल (हरियाणा)।

मनुमुक्त ‘मानव’ मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा ‘विश्व हिंदी दिवस’ के सुअवसर पर भव्य आभासी समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें आस्ट्रेलिया, सिंगापुर, ट्रिनिडाड और अमेरिका सहित १० देशों के साहित्यकारों और विद्वानों ने सहभागिता की। रवींद्रनाथ टैगोर विवि (भोपाल, मप्र) में अंतरराष्ट्रीय हिंदी-केंद्र के निदेशक डॉ. जवाहर कर्णावट की अध्यक्षता रही। अंतरराष्ट्रीय सहयोग परिषद (दिल्ली) के मानद निदेशक नारायण कुमार मुख्य अतिथि रहे।
आयोजन में केंद्रीय बी. त्रिभुवन विश्वविद्यालय (काठमांडू, नेपाल) में हिंदी विभाग की अध्यक्ष डॉ. श्वेता दीप्ति विशिष्ट अतिथि और विश्व बैंक (वाशिंगटन) की वरिष्ठ अर्थशास्त्री डॉ. एस. अनुकृति स्वागताध्यक्ष के रूप में उपस्थित रहे। न्यासी डॉ. कांता भारती के प्रेरक सान्निध्य में प्रारंभ में मुख्य न्यासी डॉ. रामनिवास ‘मानव’ ने विषय प्रवर्तन करते हुए हिंदी के वैश्विक विस्तार को अपने दोहे के से इस प्रकार रेखांकित किया- ‘चीन, रूस, ब्रिटेन तक, सात समुंदर पार। पूरी दुनिया में हुआ, हिंदी का विस्तार।।’
उद्घाटन भाषण में मुख्य अतिथि ने हिंदी को संपर्क और सद्भाव की भाषा बताते हुए कहा कि पूरे विश्व में फैले भारतीयों के कारण हिंदी अब विश्व भाषा बन चुकी है। डॉ. दीप्ति ने हिंदी को रोजगार से जोड़ने की वकालत की। डॉ. कर्णावट ने अध्यक्षीय वक्तव्य में हिंदी के विकास में प्रवासी भारतीयों की भूमिका को महत्त्वपूर्ण बताया। केंद्रीय हिंदी निदेशालय, नई दिल्ली के सहायक निदेशक द्वय डॉ. नूतन
पांडेय और डॉ. दीपक पांडेय ने प्रवासी भारतीयों को भारत का सांस्कृतिक दूत बताते हुए कहा कि विदेशों में हिंदी भाषा और भारतीय संस्कृति के प्रचार-प्रसार में उनका विशिष्ट योगदान रहा है।
कार्यक्रम में सिडनी के प्रगीत कुँअर और डॉ. भावना कुँअर, सिंगापुर सिटी की आराधना झा श्रीवास्तव, घाना की मीनाक्षी सौरभ, बुल्गारिया की डॉ. मोना कौशिक तथा भारत से विजयकुमार मिर्चे आदि कवियों ने काव्य-पाठ द्वारा कार्यक्रम को नई ऊँचाई प्रदान की, जिसे देश-विदेश के श्रोताओं की भरपूर सराहना मिली।
डॉ. पंकज गौड़ ने कुशल संचालन किया।