हरिहर सिंह चौहान
इन्दौर (मध्यप्रदेश )
************************************
नारी:संघर्ष, शक्ति, समाज और सफलता…
सशक्त शक्ति का वह रूप है,
मन में लिए जो ‘कोमलता’
विशाल ‘हृदय’ में दया व करुणा का संचार लिए,
नारी देवी है, वह है, शक्ति स्वरूपा।
उनकी ‘उड़ान’ दूर आसमान की,
उन्हें आगे बढ़ने दो, ‘रोको’ मत तुम
नारी को कमजोर कभी ‘मत’ समझना,
नारी ‘देवी’ है, वह है, शक्ति स्वरूपा।
आज नया जमाना, नये ‘विचारों’ का का नयापन,
जिसमें हर एक क्षेत्र में ‘नारी’ ही अव्वल है
कोई भी काम ‘छोटा’ या बड़ा नहीं उनके लिए,
क्योंकि ‘नारी’ देवी है, वह शक्ति स्वरूपा।
पुरानी ‘रूढ़िवादी’ सोच पर अब विराम लगाना होगा,
क्योंकि आज कदम से कदम मिलाकर ‘आगे’ बढ़ रही है नारी।
वह ‘धरती’ से आसमान की दूरी नाप रहीं हैं विश्व में,
क्योंकि ‘नारी’ देवी है, वह है शक्ति स्वरूपा॥