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संकल्प को सफल बनाना है

वंदना जैन
मुम्बई (महाराष्ट्र)
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‘स्वागत, संकल्प, संघर्ष और सफलता’ (नववर्ष २०२६ विशेष)….

विस्तृत गगन को नाप कर छोटा-सा बनाना है,
स्वर को मुखर और संकल्प को सफल बनाना है।

पतझड़ को झाड़ कर बसंती छटा को बिखर जाना है,
राह कंटकों को पराजित कर लक्ष्य को पा जाना है।

संघर्ष से तपती देह को शीतल चाँदनी में लेटाना है,
तूफानों का लेकर मजा सफ़र पर निकल जाना है।

हँसना है खिलखिलाकर और संतापों को चिढ़ाना है,
अश्रुओं पी-पी कर भी लक्ष्य की प्यास को बढ़ाना है।

मुँह मोड़ कर जाने वालों को एक दिन लौट कर आना है,
तुझसे लेकर प्रेरणा एक दिन ज़माने को बदल जाना है।

आँचल में सूर्य तपन छुपाकर व्यक्तित्व प्रखर बनाना है,
कंटीली डगर पर चल कर टीस घावों की बिसराना है।

स्वागत में खुशियों की एक दिन, पलकों को बिछ जाना है।
परीक्षा की कटार पर चल, सफलता को हार पहनाना है॥

परिचय-वंदना जैन की जन्म तारीख ३० जून और जन्म स्थान अजमेर(राजस्थान)है। वर्तमान में जिला ठाणे (मुंबई,महाराष्ट्र)में स्थाई बसेरा है। हिंदी,अंग्रेजी,मराठी तथा राजस्थानी भाषा का भी ज्ञान रखने वाली वंदना जैन की शिक्षा द्वि एम.ए. (राजनीति विज्ञान और लोक प्रशासन)है। कार्यक्षेत्र में शिक्षक होकर सामाजिक गतिविधि बतौर सामाजिक मीडिया पर सक्रिय रहती हैं। इनकी लेखन विधा-कविता,गीत व लेख है। काव्य संग्रह ‘कलम वंदन’ प्रकाशित हुआ है तो कई पत्र-पत्रिकाओं में आपकी रचनाएं प्रकाशित होना जारी है। पुनीत साहित्य भास्कर सम्मान और पुनीत शब्द सुमन सम्मान से सम्मानित वंदना जैन ब्लॉग पर भी अपनी बात रखती हैं। इनकी उपलब्धि-संग्रह ‘कलम वंदन’ है तो लेखनी का उद्देश्य-साहित्य सेवा वआत्म संतुष्टि है। आपके पसंदीदा हिन्दी लेखक-कवि नागार्जुन व प्रेरणापुंज कुमार विश्वास हैं। इनकी विशेषज्ञता-श्रृंगार व सामाजिक विषय पर लेखन की है। जीवन लक्ष्य-साहित्य के क्षेत्र में उत्तम स्थान प्राप्त करना है। देश और हिंदी भाषा के प्रति विचार-‘मुझे अपने देश और हिंदी भाषा पर अत्यधिक गर्व है।’