कुमारी ऋतंभरा
मुजफ्फरपुर (बिहार)
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नारी:संघर्ष, शक्ति, समाज और सफलता…
कई संघर्षों के बीच,
कई कटाक्षों के पार
कटी-कटाक्ष अपमान के बीच के बाद,
संघर्षों से संघर्ष कर
गालियों-घरों के अंदर,
सदैव खुशबू फैलाती है नारी।
पसीने से लथपथ चेहरा,
जख्मों से भरे हाथ
घिसे नाखूनों वाली नारी,
फूल-से कोमल हाथ, जख्म सहते हाथ
दर्द सहते, चोट खाते हाथ,
यही हाथ खुशबू रचते हैं
संघर्ष करते हैं ऐसे हाथ।
कुछ घरों में, गलियों में
सिसकते चेहरे मुल्क की मशहूर नारियाँ
इतने कष्ट सहे सदा मन,
घर के कुछ लोग सदा गंदे अपशब्द सुना देते
सदा सुनती सहती नारियाँ।
दुनिया की सारी महान नारियाँ,
दुनिया की सारी अद्भुत नारियाँ
सदा नया रचती इतिहास।
आगे बढ़ने में सदा करती संघर्ष,
बनाती है इतिहास नारियाँ॥