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अमर ‘लता’

डॉ.अशोक
पटना(बिहार)
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सुरों की अमर ‘लता’ विशेष-श्रद्धांजलि…

सदियाँ याद करतीं रहेगी,
एक स्वर की उन्नत आवाज को
दिल में छिपाएं रखेंगी,
देश के रोशन आफताब को।

अलविदा! स्वर कोकिला,
तू दिलो-दिमाग में हरपल
छाईं रहेगी यहां,
सुर की स्वर साम्राज्ञी लता
तू तन-मन से सबको,
भाती रहेगी सदा।

भारत ने अपने रत्न को दिया,
भारत के सुर अनन्त में
विलीन हो गया,
अनन्त यात्रा पर अपनी लता दीदी का,
जाना एक दुखदायी क्षण है।

समस्त जनमानस के हृदय में,
पैदा कर दी है अत्यंत भावुकता
जाने से रिक्तता हुई बड़ी,
क्रंदन करता दिखता दुखदायी मन।

स्वर सरस्वती लता मंगेशकर को,
मिला भरपूर मान और सम्मान यहां
भारत रत्न सहित स्वर कोकिला और,
पदम् विभूषण देकर देश ने बढ़ाया।
लता दीदी का उन्नत आदर्श संग,
स्वर साम्राज्ञी जैसा अदभुत सम्मान यहां॥

परिचय-पटना(बिहार) में निवासरत डॉ.अशोक कुमार शर्मा कविता,लेख,लघुकथा व बाल कहानी लिखते हैं। आप डॉ.अशोक के नाम से रचना कर्म में सक्रिय हैं। शिक्षा एम.काम.,एम.ए.(राजनीति शास्त्र,अर्थशास्त्र, हिंदी,इतिहास,लोक प्रशासन एवं ग्रामीण विकास) सहित एलएलबी,एलएलएम,सीएआईआईबी, एमबीए व पीएच-डी.(रांची) है। अपर आयुक्त (प्रशासन)पद से सेवानिवृत्त डॉ. शर्मा द्वारा लिखित अनेक लघुकथा और कविता संग्रह प्रकाशित हुए हैं,जिसमें-क्षितिज,गुलदस्ता, रजनीगंधा (लघुकथा संग्रह) आदि है। अमलतास,शेफालीका,गुलमोहर, चंद्रमलिका,नीलकमल एवं अपराजिता (लघुकथा संग्रह) आदि प्रकाशन में है। ऐसे ही ५ बाल कहानी (पक्षियों की एकता की शक्ति,चिंटू लोमड़ी की चालाकी एवं रियान कौवा की झूठी चाल आदि) प्रकाशित हो चुकी है। आपने सम्मान के रूप में अंतराष्ट्रीय हिंदी साहित्य मंच द्वारा काव्य क्षेत्र में तीसरा,लेखन क्षेत्र में प्रथम,पांचवां,आठवां स्थान प्राप्त किया है। प्रदेश एवं राष्ट्रीय स्तर के अखबारों में आपकी रचनाएं प्रकाशित हुई हैं।

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