मेघना
पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)****************************** ३८ वर्षीय मेघना अपने घर की बॉलकनी से डूबते सूरज को देख रही थी, आसमान में चारों तरफ उदासी के पीले बादल छाये हुए थे। उसके मन का एक कोना भीगा हुआ था। रह-रह कर उसका मन हिचकोले खा रहा था, वह अजीब तरह का सूनापन महसूस कर रही थी।आँसुओं की गरम-गरम बूंदें … Read more