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आओ होली खेलें कान्हा

स्मृति श्रीवास्तव
इंदौर (मध्यप्रदेश)
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रंग और हम(होली स्पर्धा विशेष )…

आओ होली खेलें कान्हा,
नहीं चलेगा कोई बहाना
रंग तुम भी सारे चटक डालना,
जीवन को तुम यूँ रंगीन बनाना।

प्रेम पागी गुझिया लाई,
ममता डाल कर पापड़ी बनाई
संग स्नेह की ठंडाई लाई,
आकर भोग लगाओ कन्हाई।

हँसी-ठिठोली खूब करेंगे,
आओ तुम से गले भी मिलेंगे
तुम भी जरा प्रेम दिखाना,
जीवन को तुम खुशहाल बनाना।

काम-क्रोध की जला के होली,
मद-लोभ से बना के दूरी
खुशियों का ही हमें रंग लगाना,
जीवन को सदा यूँ ही महकाना।

तेरी पिचकारी प्रेम भरी हो,
गुलाल में थोड़ी ममता भरी हो
ऐसा रंग-गुलाल हमको लगाना,
जीवन मेरा खुशहाल बनाना।

ऐसी अर्जी मैंने आज लगाई,
नहीं चलेगी कोई चतुराई।
सुन भी लो अब मेरी दुहाई,
आओ होली खेलें कन्हाई॥

परिचय : स्मृति श्रीवास्तव का जन्म १ नवम्बर १९७३ को कोलारस (जिला- शिवपुरी) में हुआ है। वर्तमान निवास स्थान इन्दौर में है। शिक्षा एम.ए. (इतिहास) है,जबकि पेशा परामर्श एवं लेखन है। गतिविधि के रूप में ५ साल से इंदौर लेखिका संघ और कई साहित्यिक समूह से जुड़ी हुई हैं। राष्ट्रीय कहानी संग्रह,लघु कथा कहानी संग्रह,साझा काव्य संग्रह के अलावा पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएँ छप चुकी हैं।

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