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आज भी वह तो लुटती है

गुरुदीन वर्मा ‘आज़ाद’
बारां (राजस्थान)
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नारी और जीवन (अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस)….

बनकर बाजार की वस्तु,वह हर रोज सजती है।
मुजरे दरबार की रौनक,वह अक्सर बनती है॥

वह एक सेज होती है,नेता लोगों के घर की,
वह एक प्यास होती है,नशा-ए-इश्क एक दिल की।
दौलत वालों के लिए वह,सौदा नफा का करती है,
बनकर बाजार की वस्तु…॥

रही पिंजरे में ही बन्द,बेटी,बहू,माँ वह बनकर भी,
देती रही अग्नि परीक्षा,राम की सीता बनकर भी।
चाहे हो राम या रावण,आज भी वह तो लुटती है,
बनकर बाजार की वस्तु…॥

नचाते हैं महफिल में,खिलौना दिल का बनाकर,
जलाता है उसको चिराग,पतंगा अपना बनाकर।
हस्ती उसकी है गुलाम,जुबां अक्सर बन्द रखती है,
बनकर बाजार की वस्तु…॥

परिचय- गुरुदीन वर्मा का उपनाम जी आज़ाद है। सरकारी शिक्षक श्री वर्मा राजस्थान के सिरोही जिले में पिण्डवाड़ा स्थित विद्यालय में पदस्थ हैं। स्थाई पता जिला-बारां (राजस्थान) है। आपकी शिक्षा स्नातक(बीए)व प्रशिक्षण (एसटीसी) है।इनकी रूचि शिक्षण,लेखन,संगीत व भ्रमण में है। साहित्यिक गतिविधि में सक्रिय जी आजाद अनेक साहित्य पटल पर ऑनलाइन काव्य पाठ कर चुके हैं तो अनेक पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित हुई हैं। प्रकाशित पुस्तक ‘मेरी मुहब्बत’ साहित्य खाते में है तो कुछ पुस्तक प्रकाशन में हैं।

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