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आहार जितना शाकाहारी, उतना लाभ

डॉ.अरविन्द जैन
भोपाल(मध्यप्रदेश)
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आहार-भोजन हर व्यक्ति का अपना-अपना चयन होता है। जब हम १० रूपए का घड़ा खरीदते हैं, तो उसे ठोक-बजा कर देखते हैं, उसी प्रकार जब अपने आहार का चयन करते हैं, तो उसके ऊपर भी सोच-विचार करना आवश्यक होना चाहिए, पर आजकल जल्दी स्वस्थ-पुष्ट होने के लिए अखाद्य पदार्थों का चयन कर खाते हैं। भोजन यानी भोग से जल्दी नष्ट होना, आहार यानी आरोग्यवर्धक और हानिरहित कहलाता है। शाकाहार यानी शांति कारक और हानिरहित को शाकाहार कहते हैं, और मांसाहार यानी मानसिक और शारीरिक हानि पहुंचाए उसे मांसाहार कहते हैं।
शाकाहार और मांसाहार रासायनिक दृष्टिकोण से प्रोटीन, खनिज, फैट कार्बोहाइड्रेट आदि से समान होते हैं, पर कुछ ऐसे रसायन होते हैं जो मानव जाति के लिए लाभकारी नहीं होते हैं। इसलिए सामान्य अंतर समझ लेना जरुरी है।
◾स्वास्थ्य लाभ-एक सुनियोजित शाकाहारी भोजन फल, सब्जियों, साबुत अनाज और फलियों से भरपूर होता है, जो हृदय रोग, मोटापे और कुछ कैंसर के कम जोखिम के लिए जाने जाते हैं। इसके विपरीत मांस में उच्च आहार इन स्वास्थ्य समस्याओं के उच्च जोखिम से जुड़ा हुआ है।
◾पर्यावरणीय प्रभाव-पशु, कृषि वनों की कटाई, जल प्रदूषण और ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन का एक प्रमुख कारण है। शाकाहारी भोजन के लिए कम संसाधनों की आवश्यकता होती है, जो इसे पर्यावरण के अनुकूल बनाता है।
◾नैतिक विचार-कई शाकाहारियों का मानना है कि भोजन के लिए जानवरों को मारना नैतिक रूप से गलत है। शाकाहारी भोजन का चयन करके, भोजन के लिए पाले जाने वाले पशुओं की संख्या को कम कर दिया जाता है।
◾लागत प्रभावी-शाकाहारी भोजन आम तौर पर एक ऐसे आहार से कम खर्चीला होता है, जिसमें मांस शामिल होता है। पौधे-आधारित प्रोटीन जैसे बीन्स, दाल और टोफू अक्सर पशु-आधारित प्रोटीन की तुलना में कम महंगे होते हैं। इसे इस बात से सही समझ सकते हैं-जैसे आलू, प्याज़, टमाटर, मटर, दालें, सब्जियाँ दूध और अन्य दूध जन्य खाद्य सामग्री मांसाहार की अपेक्षा सस्ती हैं। जैसे चिकन अत्यंत महंगे और कई प्रकार से हानिकारक भी होते हैं।
◾पोषण संबंधी पर्याप्तता-एक सुनियोजित शाकाहारी आहार इष्टतम स्वास्थ्य के लिए आवश्यक सभी आवश्यक पोषक तत्व प्रदान कर सकता है। विभिन्न प्रकार के विकल्पों के साथ शाकाहारी सभी प्रोटीन, आयरन, कैल्शियम और अन्य पोषक तत्व प्राप्त कर सकते हैं।
◾दीर्घायु-अध्ययनों से पता चला है कि शाकाहारियों में जल्दी मृत्यु का जोखिम कम होता है और मांसाहारियों की तुलना में औसतन अधिक समय तक जीवित रहते हैं।
◾वजन प्रबंधन-शाकाहारी भोजन में अक्सर मांस आधारित आहार की तुलना में कैलोरी और वसा की मात्रा कम होती है, जो वजन प्रबंधन और मोटापे के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है।
◾एंटीबायोटिक प्रतिरोध-कारखाने के खेतों में एंटीबायोटिक दवाओं के अत्यधिक उपयोग से एंटीबायोटिक प्रतिरोधी जीवाणु का विकास हो सकता है। शाकाहारी भोजन का चयन करके कारखाने के खेतों से मांस की मांग कम हो जाती है और उक्त के प्रसार को धीमा करने में मदद मिल सकती है।
याद रखें, आहार विकल्प चाहे जो भी हों, यह महत्वपूर्ण है कि आप उचित निर्णय लेकर अपने भोजन विकल्पों के नैतिक, पर्यावरणीय और स्वास्थ्य प्रभावों पर विचार करें। जो आहार जितना सात्विक होगा, वह शांतिकारक पौष्टिक और लाभप्रद होगा।

परिचय- डॉ.अरविन्द जैन का जन्म १४ मार्च १९५१ को हुआ है। वर्तमान में आप होशंगाबाद रोड भोपाल में रहते हैं। मध्यप्रदेश के राजाओं वाले शहर भोपाल निवासी डॉ.जैन की शिक्षा बीएएमएस(स्वर्ण पदक ) एम.ए.एम.एस. है। कार्य क्षेत्र में आप सेवानिवृत्त उप संचालक(आयुर्वेद)हैं। सामाजिक गतिविधियों में शाकाहार परिषद् के वर्ष १९८५ से संस्थापक हैं। साथ ही एनआईएमए और हिंदी भवन,हिंदी साहित्य अकादमी सहित कई संस्थाओं से जुड़े हुए हैं। आपकी लेखन विधा-उपन्यास, स्तम्भ तथा लेख की है। प्रकाशन में आपके खाते में-आनंद,कही अनकही,चार इमली,चौपाल तथा चतुर्भुज आदि हैं। बतौर पुरस्कार लगभग १२ सम्मान-तुलसी साहित्य अकादमी,श्री अम्बिकाप्रसाद दिव्य,वरिष्ठ साहित्कार,उत्कृष्ट चिकित्सक,पूर्वोत्तर साहित्य अकादमी आदि हैं। आपके लेखन का उद्देश्य-अपनी अभिव्यक्ति द्वारा सामाजिक चेतना लाना और आत्म संतुष्टि है।

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