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ईश्वर की सर्वश्रेष्ठ कृति

प्रणिता राकेश सेठिया ‘परी’
रायपुर(छत्तीसगढ़)
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ईश्वर ने बनाई ये विराट सृष्टि,
जीवंत किया फिर ये संसार।
सोचा-समझा फिर महसूस किया,
कहाँ है इसमें निस्वार्थ प्यार…?
अपने पाक उन्नत विचारों से बनाई,
एक विशाल-सी हसीन क्यारी।
निर्मित हो उठी एक मूरत और,
फिर नाम रखा उसका नारी।
जिस लय से कार्यरत है दिनभर,
प्रकृति की है ये अनमोल माया।
उसी तरह दिन रात समृद्ध करती,
नारी की ये अदभुत-सी काया।
पावन हो उठा ये जग भी,
जब नारी का जन्म हुआ।
कोमल,ममतामयी तो कभी,
इसका स्वरूप प्रचंड हुआ।
मातृत्व,ज्ञान,शांति,शक्ति,
और मानवता की रूपक है।
नतमस्तक हो कृतज्ञ हुआ सारा संसार,
ये देहरी पर जलता अनवरत दीपक है।
प्रेम,करुणा,वात्सल्य से अपने ये,
सबका मन मोह लेती है।
क्रोध,बैर,द्वेष को दूर कर,
सारे कष्ट ये सह लेती है।
ऐसी कृति बनाई नारी को,
जब प्रेम करे तो स्वर्ग मिले।
और गर किया इसे क्रोधित,
ईश्वर स्वयं भयभीत हो उठे।
प्यार में इसके जीवन का वास,
दुआओं में खुशियों की श्वांस।
जहां मान न मिले नारी को,
उस संसार में क्या रखा है।
शब्द नहीं हैं बयां करने को,
अद्वितीय शक्ति ऐसी ये नारी है।
जागो,बढ़ो,आदर करो उसका,
इसमें समायी दुनिया सारी है…
ईश्वर की सर्वश्रेष्ठ कृति नारी है।
मकान को जो वजूद से घर बना दे,
रूठी हुई खुशियों को जो मना दे।
पारिवारिक सृष्टि की रचयिता,
अदभुत कोई और नहीं ये नारी है।
मान करो,उसका सम्मान करो,
नारी पर अभिमान करो,
नारी पर अभिमान करो॥

परिचय : प्रणिता राकेश सेठिया का निवास रायपुर(राज्य छत्तीसगढ़)में है।प्रणिता राकेश सेठिया का लेखन में उपनाम ‘परी’ है। लेख,कविता, गीत,नाटिका,लघुकथा,कहानी,हाइकु,तुकांत-अतुकांत आदि आप रचती हैं। आपकी साहित्यिक उपलब्धि यही है कि,कई सामाजिक पत्रिकाओं तथा समाचार पत्रों में रचनाएं प्रकाशित होती हैं। आपको अब तक शतकवीर सम्मान,महफ़िल-ए-ग़ज़ल,काव्य विभूषण और काव्य भूषण सम्मान से अलंकृत किया जा चुका है। हाइकु रचनाकारों की किताब में भी आपकी रचना प्रकाशित हुई है। बड़ी उपलब्धि में उच्च १० उद्यमी महिलाओं में आपका चौथे क्रम पर रहना है। ‘परी’ ने उत्कृष्ट समाजसेवा के लिए भी कई बार सम्मान पाया है तो सर्वश्रेष्ठ मंच संचालन हेतु भी सम्मानित हुई हैं। आप सामाजिक गतिविधि के तहत महिला मंडल की सचिव होकर सक्रिय हैं। आपकी दृष्टि में लेखन के जरिए अपने भावों से सामाजिक जागृति लाकर स्त्री वर्ग को आगे बढ़ाना है।