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एक शपथ…जिम्मेदारी

डॉ.अशोक
पटना(बिहार)
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यह जिम्मेदारी और जवाबदेही,
का एक अपूर्व दर्शन है
संवैधानिक व्यवस्था का,
सबसे प्रबल आकर्षण है।

यह एक दायित्वों-जिम्मेदारियों को,
बतलाती है
कर्तव्यों को पूरा करने का,
उत्तम पाठ पढ़ाती है।

यह एक औपचारिक संकेत है,
आचरण और व्यवहार की
खूबसूरत प्रमेय है।

तथ्य अथवा प्रतिज्ञा को
निभाने की बात करना,
शपथ ग्रहण की बात कही जाती है,
यह कर्तव्यों को पूरा करने की
एक संस्कार की संस्कृति के नाम से,
जानी व पहचानी जाती है।

कसम, सौगंध और प्रतिज्ञा,
सांस्कृतिक स्वभाव है
यह पूर्ण रूप से सुसज्जित होने पर,
दिखता उत्तम सद्भाव है।

संसार में साक्षी व दुहाई,
एक उन्नत नाम है
समस्त जनमानस में,
विस्तृत रंगों से सराबोर
सुंदर और आकर्षक श्रंगार का,
आभार और प्रणाम है।

शपथ कर्तव्यों से बांध कर,
सात्विक व्यवहार से श्रंगारित करती है
उत्तम व उच्च विचार को,
प्रमाणित सदैव करने के लिए
जीवन पर्यन्त तत्पर रहता है।

आओ हम-सब मिलकर एक,
संस्कृति और संस्कार को नया आयाम दें
एक शपथ को जीवित रखने में,
सदैव दिल से उमंगें उछालकर,
खूब उत्साह संग हृदय से संज्ञान लें॥

परिचय–पटना (बिहार) में निवासरत डॉ.अशोक कुमार शर्मा कविता, लेख, लघुकथा व बाल कहानी लिखते हैं। आप डॉ.अशोक के नाम से रचना कर्म में सक्रिय हैं। शिक्षा एम.काम., एम.ए.(अंग्रेजी, राजनीति शास्त्र, अर्थशास्त्र, हिंदी, इतिहास, लोक प्रशासन व ग्रामीण विकास) सहित एलएलबी, एलएलएम, एमबीए, सीएआईआईबी व पीएच.-डी.(रांची) है। अपर आयुक्त (प्रशासन) पद से सेवानिवृत्त डॉ. शर्मा द्वारा लिखित कई लघुकथा और कविता संग्रह प्रकाशित हुए हैं, जिसमें-क्षितिज, गुलदस्ता, रजनीगंधा (लघुकथा) आदि हैं। अमलतास, शेफालिका, गुलमोहर, चंद्रमलिका, नीलकमल एवं अपराजिता (लघुकथा संग्रह) आदि प्रकाशन में है। ऐसे ही ५ बाल कहानी (पक्षियों की एकता की शक्ति, चिंटू लोमड़ी की चालाकी एवं रियान कौवा की झूठी चाल आदि) प्रकाशित हो चुकी है। आपने सम्मान के रूप में अंतराष्ट्रीय हिंदी साहित्य मंच द्वारा काव्य क्षेत्र में तीसरा, लेखन क्षेत्र में प्रथम, पांचवां व आठवां स्थान प्राप्त किया है। प्रदेश एवं राष्ट्रीय स्तर के कई अखबारों में आपकी रचनाएं प्रकाशित हुई हैं।

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