नीलम प्रभा सिन्हा
धनबाद (झारखंड)
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व्यवहार में चाय (राष्ट्रीय चाय दिवस विशेष)….
चाय की दुकान पर अक्सर चर्चे होते थे,
हम दोनों भी चाय के दीवाने थे
प्रतिदिन मिलने के बहाने थे,
सर्दियों के मौसम में।
सुबह-सुबह एक ही डिमांड थी,
कहाँ है अदरक वाली चाय ?
रिमझिम-रिमझिम बारिश में होती,
मेरे हाथों में अदरक वाली चाय।
और दिल में होती याद तुम्हारी सिर्फ,
चाय के साथ चर्चे अनगिनत थे
हर दुकान पर भिन्न-भिन्न चर्चे,
कहीं चुनाव के, तो कहीं पड़ोसी के।
तो कहीं लड़की के, तो कहीं लड़के के,
कौन जीता, कौन हारा ?
किसकी लुगाई किसके संग भागी,
कौन क्या कर रहा है।
सारी न्यूज़ चाय की दुकान पर ही,
बहसें होतीं, चाय के बहाने सुनते थे
हर सुबह-शाम हम तुमसे मिलते थे,
दुनिया की हर बात सुन-सुनकर हँसते थे।
और हम दोनों मुस्कुराते थे,
चाय के बहाने मिलते थे।
जमाने भर की बातें तो बहाना,
हम दोनों चाय के दीवाने थे॥