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ओ मेरी प्यारी माँ

ताराचन्द वर्मा ‘डाबला’
अलवर(राजस्थान)
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ओ मेरी प्यारी माँ मैं तेरी बनावट हूँ,
तेरे सुनहरे सपनों की मैं सजावट हूँ
भावनाओं में बहकर खूब रोई है तू,
तेरी हर खुशी की मैं एक आहट हूँ।

माँ हर मुश्किल को तू सह लेती है,
तन्हाई में भी मैं तेरी मुस्कुराहट हूँ
दिल को जो सुकून मिले हर पल,
वो हँसी की मैं खिलखिलाहट हूँ।

हर ग़म को भूल गई तू मेरी ख़ुशी में,
तेरे मन के आँगन की मैं झिलमिलाहट हूँ
दूर कैसे रह पाएगी अब तू मेरे बिना,
अंधेरों के साए में मैं तेरी बौखलाहट हूँ।

माँ तू मेरे मन मंदिर का भगवान है,
मैं तेरे दिल की थरथराहट हूँ
हर खुशी मिलती है मुझे तेरे आँचल में,
तेरे आँगन की मैं जगमगाहट हूँ।

समुद्र-सी गहराई है तेरी आँखों में,
माँ मैं तेरे दिल की तड़फडा़हट हूँ
एक अजीब-सी चाहत है तेरी बातों में,
तेरी हर खुशी की माँ मैं मुस्कुराहट हूँ।

मैं जानता हूँ मुझे खोने का डर है तुझे,
मैं तेरी आत्मा की बिलबिलाहट हूँ
स्नेह का गहरा समुद्र है तेरे पास माँ,
मैं स्नेह की लहरों की सरसराहट हूँ।

सारी सारी रात जागती रही बेबसी में,
जानता हूँ मैं तेरे दिल की घबराहट हूँ।
तुझसे ही मेरे जीवन में खिला गुलाब है,
क्या लिखूं माँ, मैं तेरी ही लिखावट हूँ॥

परिचय- ताराचंद वर्मा का निवास अलवर (राजस्थान) में है। साहित्यिक क्षेत्र में ‘डाबला’ उपनाम से प्रसिद्ध श्री वर्मा पेशे से शिक्षक हैं। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में कहानी,कविताएं एवं आलेख प्रकाशित हो चुके हैं। आप सतत लेखन में सक्रिय हैं।

 

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