अमराई की छाँव मृदु अहसास

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* अमराई की छाँव सुहाती,मृदु अहसास कराती,शीतलता देकर के हमको, भावों में ले जाती।तपन भले ही पीड़ादायक,पर अमराई भाये-मोहक छाँव मनुज के तन को, राहत से सहलाती॥ अमराई की छाँव स्वर्ग-सी, सपनों में ले जाती,मधुर हवा तो गीत सुनाकर, सबको है दुलराती।मौसम को खुशहाल बनाती, मस्ती को है देती-बहुत सुहानी होती छैयाँ, … Read more

….बिके तो सपनों का रक्त बहा

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* ‘नीट’ परीक्षा के प्रश्न बिके तो  सपनों का रक्त बहा,मेहनत करने वाला छात्र भीतर ही भीतर चुप रहा।रातों जागे नयनों प्रतिफल जब सौदे  में बँट जाता-विश्वासों का टूटा दर्पण अभिभावक ने स्वयं सहा॥ कितनी आशाओं के दीप उत्तर-पुस्तक संग बुझते,सच्चे श्रम के कोमल पौध भ्रष्ट हवाओं में झुलसते।धन के आगे ज्ञान झुके तो शिक्षा शव बन जाती … Read more

शान्ति का शुभदीप जलाओ

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* युद्ध और शांति-जरूरी क्या ?… शांति का शुभदीप जलाओ, प्रेम का संदेश जगाओ,मानवता की राहों पर फिर से साहस कदम बढ़ाओ।युद्ध विषम विभीषिका से यही सीख मिलती है दुनिया-नफरत की ज्वाला त्यागकर, करुणा का सागर बहाओ॥ जलते घरों की राख में तुम सिसकियाँ फिर से जगाओ,टूटी छत के नीचे … Read more

मस्ती लेकर आई होली

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* होली मस्ती लेकर आई, खेल रहे कन्हाई,बरसाने से राधारानी, दौड़ी-दौड़ी आई।खेल रहे ग्वाले-ग्वालाएँ, मुखड़े हैं रंगीन-रंग-अबीरों की आभा तो, सारे ब्रज में छाई॥ खेल रहे देवर-भौजाई, उल्लासित है तन-मन,जीजू और सालियाँ खेलें, इतराता है आँगन।मची हुई हुड़दंग आज तो, हुरियारों का ज़ोर-लगता है पल में जी लेंगे, अब तो सारा जीवन॥ … Read more

आन बचाने टकराते

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* माटी की लाज बचाने को, रण-पथ अविरत बढ़ते जाते,हँसते-हँसते प्राणों अर्पण, भारत वंदन शीश झुकाते।घर-आँगन सूना रह जाता, आँसू मौन भक्ति रस बहते-वीर-सपूतों अमर शहादत, स्वर्ण अतीत विजय लिख जाते॥ ध्वजा तिरंगा आन बचाने, आँधी तूफ़ानों टकराते,वक्षस्थल पर गोली सहकर, ख़ुद सीमा से नहीं हटाते।लखि पुलवामा रोती ममता, शहीद … Read more

जीवन कठपुतली का खेल

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** यह संसार सिर्फ़ एक मेला है,हर प्राणी यहाँ अकेला है।सुख-दु:ख सब है इस जीवन में-बस कठपुतली का खेला है॥ सबसे एक विनय हमारी है,भाषा की प्रगति ज़िम्मेदारी है।संग साथ-साथ चलते रहना-नवयुवकों की अब बारी है॥

फागुन आयो रे…

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* फागुन आयो रे, बौराई क्यारी-क्यारी,महके बाग-बगैयाँ, रंगत छाई न्यारी।ढोलक की थापों में झूमी गैयाँ-नारी-बोल उठी हर डाली, किलकी मारी क्यारी॥ फागुन आयो रे, पिचकारी रंग बरसाए,भीगे चुनर अंचल, साजन मन ललचाए।हँसी की फुहारों से मन का मैल धुलाए-राधा संग श्याम की गलियों में धूम मचाए॥ फागुन आयो रे, सरसों … Read more

वादा निभाया था मैंने

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** अजनबी को गले से लगाया था मैंने,जो वादा किया वो निभाया था मैंने।प्यार की राह पर घर बसाया कभी-अपना सब कुछ उसी पर लुटाया था मैंने॥ संसार में सब कुछ बस एक सपना है,यहाँ कुछ भी तो नहीं अपना है।जिसके भाग्य में लिखा है जितना-उतना ही तो उसको मिलना है॥

जीते जी मृत होना

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* जीते जी मृत होना यही, जब कर्म शून्य हो प्राण है,आलस्य की तिमिर छाया में, गलती जीवनी पहचान है।भौतिक मृगतृष्णा माया में, उलझे है पल-पल हर श्वांस-चलती-फिरती बनी लाश वे, भूले आस्था मनुज गान है॥ अकर्मण्यता ही अपमान है, मानवता का क्षय मसान है,कर्तव्यों से विमुख हुआ जो, उसका … Read more

बासंती दौर

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* सखी! आज तो भौंरे, कलियों को चूमे,है पराग की चाह, वनों-उपवन में घूमे।मन में लिए उमंग, बसंती हवा चल रही-जिसने पाया मीत, वहीं मस्ती में झूमे॥ आया है ऋतुराज, गीत मौसम के गाता,सरसों का उल्लास, आज जन-जन को भाता।वन-उपवन हैं दिव्य, कछारों में है यौवन-मिलन-नेह का भाव, गीत अभिसारी गाता॥ कामदेव … Read more