जगन्नाथ जी कृपा करो

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)****************************************** हे! जगन्नाथ जी सब पे कृपा करो,मांगलिक शुभ पलों को सदा ही झरो।जो भी अवगुण लिए है, मनुज अब यहाँ-उनको इस जग के स्वामी, अभी ही हरो॥ हैं उड़ीसा में स्वामी जगन्नाथ जी,जिनकी रथयात्रा धर्म के साथ जी।संग में हैं बहन और बड़े भ्रातृ भी-तीनों करुणा जगतहित लिए हाथ जी॥ कितनी … Read more

मंजिल की तलाश

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)****************************************** मंज़िलों की तरफ, बढ़ना है अब हमें,मुश्किलों से बहुत, लड़ना है अब हमें।कैसी भी हो परेशानी, कठिनाई अब-अपनी ज़िद पर शरद अड़ना है अब हमें॥ मंज़िलों की तरफ कूच करना ही है,हर सफलता को अब नित्य वरना ही है।हौसला सँग में होगा, तो हारूँ नहीं-बनके जलधार हमको तो बहना ही है॥ … Read more

वो पिता की सीख

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* मेरी असली प्रेरणा…. पिता ने इतना ही कहा— सत्य पथ कभी न छोड़ना, लाभ मिले या हानि मिले, निज धर्म नहीं तुम तोड़ना।क्षणिक सफलता के पीछे तुम मत अपने मूल्य गंवाना-चरित बचा तो जीवनभर सम्मान  रहेगा जोड़ना॥ पिता ने सिखलाया मुझको श्रम से बढ़कर है धन क्या ?कर्मठता की उजली आभा से  सुंदर जीवन क्या ?भाग्य सहारे बैठा मानव मंज़िल कभी पा सकता-पुरुषार्थों … Read more

संयमित भोजन औषधि

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* भोजन यदि संयमित हो, जीवन     का वरदान बने,तन-मन की हर तक़लीफ का सहज समाधान बने।दवा खोजती फिरती है जिस रोगी  के द्वार पर-सात्विक आहार ही उसकी प्रथम  पहचान बने॥ अन्न नहीं केवल दाने, प्रकृति    अमृत प्याला है,हर कण में स्वास्थ्य, शक्ति का अनुपम उजियाला है।जितना चाहिए उतना ही थाली में मान करो-अतिभोजन रोगों का खुला हुआ शिविरशाला है॥ ताज़े फलों, साग-सब्जियाँ औषधि का भंडार हैं,इनसे ही प्रसन्नचित्त ज़िंदगी के   आधार … Read more

राधा-कृष्ण की अलौकिक प्रेम-लीला

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* राधा के दृग में प्रेम-ज्योति, श्याम अधर मुरली प्यारी,कुंज-निकुंज महके जैसे खिल उठी हो फुलवारी।हिय निकुंज प्रेम वह जिसमें स्वार्थ कहीं भी न ठहरे,जिसकी शक्ति से हार गई जग की हर अंधियारीf॥ श्याम-संग राधा खड़ी साहस की अमर कहानी,प्रेम जहाँ सम्मान सुरक्षित, पूजित होती नारी।अन्यायों के सिंहासनों को प्रेम सदा झुकवाता,करुणा, सत्य, समत्वबोध से होती  विजयज्ञ हमारी॥ मुरली मधुरा तान सुनाकर मोहन जग समझाते,राधा बनकर प्रेम-समर्पण के नव … Read more

अमराई की छाँव मृदु अहसास

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* अमराई की छाँव सुहाती,मृदु अहसास कराती,शीतलता देकर के हमको, भावों में ले जाती।तपन भले ही पीड़ादायक,पर अमराई भाये-मोहक छाँव मनुज के तन को, राहत से सहलाती॥ अमराई की छाँव स्वर्ग-सी, सपनों में ले जाती,मधुर हवा तो गीत सुनाकर, सबको है दुलराती।मौसम को खुशहाल बनाती, मस्ती को है देती-बहुत सुहानी होती छैयाँ, … Read more

….बिके तो सपनों का रक्त बहा

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* ‘नीट’ परीक्षा के प्रश्न बिके तो  सपनों का रक्त बहा,मेहनत करने वाला छात्र भीतर ही भीतर चुप रहा।रातों जागे नयनों प्रतिफल जब सौदे  में बँट जाता-विश्वासों का टूटा दर्पण अभिभावक ने स्वयं सहा॥ कितनी आशाओं के दीप उत्तर-पुस्तक संग बुझते,सच्चे श्रम के कोमल पौध भ्रष्ट हवाओं में झुलसते।धन के आगे ज्ञान झुके तो शिक्षा शव बन जाती … Read more

शान्ति का शुभदीप जलाओ

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* युद्ध और शांति-जरूरी क्या ?… शांति का शुभदीप जलाओ, प्रेम का संदेश जगाओ,मानवता की राहों पर फिर से साहस कदम बढ़ाओ।युद्ध विषम विभीषिका से यही सीख मिलती है दुनिया-नफरत की ज्वाला त्यागकर, करुणा का सागर बहाओ॥ जलते घरों की राख में तुम सिसकियाँ फिर से जगाओ,टूटी छत के नीचे … Read more

मस्ती लेकर आई होली

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* होली मस्ती लेकर आई, खेल रहे कन्हाई,बरसाने से राधारानी, दौड़ी-दौड़ी आई।खेल रहे ग्वाले-ग्वालाएँ, मुखड़े हैं रंगीन-रंग-अबीरों की आभा तो, सारे ब्रज में छाई॥ खेल रहे देवर-भौजाई, उल्लासित है तन-मन,जीजू और सालियाँ खेलें, इतराता है आँगन।मची हुई हुड़दंग आज तो, हुरियारों का ज़ोर-लगता है पल में जी लेंगे, अब तो सारा जीवन॥ … Read more

आन बचाने टकराते

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* माटी की लाज बचाने को, रण-पथ अविरत बढ़ते जाते,हँसते-हँसते प्राणों अर्पण, भारत वंदन शीश झुकाते।घर-आँगन सूना रह जाता, आँसू मौन भक्ति रस बहते-वीर-सपूतों अमर शहादत, स्वर्ण अतीत विजय लिख जाते॥ ध्वजा तिरंगा आन बचाने, आँधी तूफ़ानों टकराते,वक्षस्थल पर गोली सहकर, ख़ुद सीमा से नहीं हटाते।लखि पुलवामा रोती ममता, शहीद … Read more