रूठती है ज़िंदगी
डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* राहों में काँटे मिलें तो मुस्कराती है ज़िंदगी,टूटे हुए सपनों को फिर से सजाती है ज़िंदगी।हार मानकर बैठना तो मौत जैसा होगा यहाँ-गिरकर सँभलने वालों को गले लगाती ज़िंदगी॥ कभी आँसू पिलाती, कभी हँसाती है यह ज़िंदगी,कभी अपनों की दूरी का दर्द देती है ज़िंदगी।जो अँधेरों में भी उम्मीद का नित दीपक जलाए,उसी केलिए नए सवेरे को लाती है … Read more