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करें हिन्दी पर अभिमान

डॉ. कुमारी कुन्दन
पटना(बिहार)
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हिन्दी और हमारी जिन्दगी….

सिंधु को हिन्दु बोले ईरानी,
हिन्दू से बना ,अपना हिन्दुस्तान
भाषा से ही तो होती है अपनी,
सभ्यता-संस्कृति की पहचान।

सबकी अपनी-अपनी भाषा,
अपने देश की अलग पहचान
अपनी भाषा हिन्दी पर भी,
होना चाहिए हमें स्वाभिमान।

जो ज्यादा बोली जाती है,
जो ज्यादा समझी जाती है
वो मातृभाषा अपनी हिन्दी,
जो प्यार-भाव समझाती है।

राष्ट्र एकता अपनी बनी रहे,
अहम भूमिका है निभाती
सबसे ज्यादा हिन्दी ही तो,
दुनिया में है बोली जाती।

११ स्वर और ३३ व्यंजन,
इसका करते हैं अभिनंदन
सहज सरल है इनका ज्ञान,
करें हिन्दी पर सब अभिमान।

छंद-अलंकार से सुसज्जित,
अपनी भाषा बड़ी ही प्यारी
हिन्दी का प्रयोग करें हम सब,
हिन्दी में ही हो बात हमारी।

मातृभाषा है हिन्दी हमारी,
आपस में लोगों को जोड़े।
राष्ट्रीयता का बने सम्बल,
कोई इससे मुख ना मोड़े॥