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कर दिया बेगाना

श्रीमती देवंती देवी
धनबाद (झारखंड)
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जब से आए हो चाँद तुम, हमारे सूने-सूने आँगन में,
मन्दिर बना लिए हो चाँद तुम तो, मेरे मन के प्राँगण में।

तेरे आने से चाँद जाने तक, मैं तुझको ही याद करती हूँ,
प्यारे चाँद नित्य तुम्हारे नाम की, माला फेरा करती हूँ।

मेरे मन के मीत चाँद ले चलो, मुझे अपने गगन के वतन,
थक हार चुकी हूँ धरा पर, मेरा अब नहीं लगता है मन।

ओ प्यारे चाँद तुम अपने मित्र ध्रुव तारा से मुझे मिलाना,
‘देवन्ती’ सखी है तुम्हारी, सभी तारों से परिचय कराना।

चाँदनी रात में चुपके, खिड़की से तुम अन्दर आ जाते हो,
प्रेम नींद में मैं सोई रहती हूँ, तुम रोज मुझको जगाते हो।

कोमल हो चाँद,जैसे मखमली चादर, ओढ़ती हूँ रात में,
हवा बसन्ती से,फूलों की खुशबू भी, भेजते हो प्रभात में।

जैसे शून्य गगन में चपला चमकती, बहती मन्द पुरवाई,
सच मानना मित्र चाँद, उसी तरह मैं तुमसे प्रीत लगाई।

हर चाँदनी रात में तुम आते रहना चाँद, नहीं भूल जाना,
वरना जानूंगी तुम्हें भी सारे जहाँ के जैसा, किया बेगाना॥

परिचय– श्रीमती देवंती देवी का ताल्लुक वर्तमान में स्थाई रुप से झारखण्ड से है,पर जन्म बिहार राज्य में हुआ है। २ अक्टूबर को संसार में आई धनबाद वासी श्रीमती देवंती देवी को हिन्दी-भोजपुरी भाषा का ज्ञान है। मैट्रिक तक शिक्षित होकर सामाजिक कार्यों में सतत सक्रिय हैं। आपने अनेक गाँवों में जाकर महिलाओं को प्रशिक्षण दिया है। दहेज प्रथा रोकने के लिए उसके विरोध में जनसंपर्क करते हुए बहुत जगह प्रौढ़ शिक्षा दी। अनेक महिलाओं को शिक्षित कर चुकी देवंती देवी को कविता,दोहा लिखना अति प्रिय है,तो गीत गाना भी अति प्रिय है |

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