हरिहर सिंह चौहान
इन्दौर (मध्यप्रदेश )
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घर का उजाला… बेटियाँ (राष्ट्रीय पुत्री दिवस विशेष)….
नन्हे-नन्हे शुभ ‘कदमों’ से वह आती है,
संसार के इस ‘आकाश’ तले
हर घर में ‘उजाला’ भर देती बेटियाँ,
खिलखिलाती हुई ‘कलियाँ’ हैं बेटियाँ।
दुःख या दर्द, हर समय हमेशा साथ देती है,
क्योंकि हमेशा से साथ देती हैं हमारी बेटियाँ
सिर्फ एक को नहीं, दो घरों को ‘रोशन’ करती हैं,
खिलखिलाती हुई ‘कलियाँ’ हैं बेटियाँ।
लोग भले बेटों को ‘अंश’ मानते हैं,
लेकिन बेटियाँ तो,’वंशों’ को सम्मान देती हैं।
आज लड़कों को अपना बनाने वालों,
आने वाला कल बेटियों का है, खिलखिलाती हुई ‘कलियाँ’ हैं बेटियाँ॥