ममता सिंह
धनबाद (झारखंड)
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खुद के लिए तुम खुद ही खड़े रहा करो,
दूसरों से न इसकी अपेक्षा कभी किया करो।
खुद का सम्मान तुम खुद ही किया करो,
दूसरों से न अपमान की प्रतीक्षा में रहा करो।
जो लोग तुमसे जलते और घृणा किया करते हैं,
उन्हें और भी तुम आग में घी जला दिया करो।
खुद को तुम बुलंदियों के शहर में देखा करो,
दूसरों को नाकामी के गाँव में छोड़ दिया करो।
जो तुम्हारे हितैषी हैं, उनका भी हित कर दिया करो,
खुद को सफलताओं का आदी बना लिया करो।
आज भी बिना स्वार्थ के कोई साथ नहीं देता,
तुम भी कभी कभी थोड़ा स्वार्थी बन जाया करो।
प्रेम की भाषा को सब कमज़ोर और मूक समझते हैं,
तुम भी कभी नफ़रत की भाषा समझा दिया करो।
तुम हमेशा अपना मुकाम खुद ही बना लिया करो,
तुम खुद को हमेशा मुकम्मल और स्वस्थ रखा करो।
तुम खुद हँसो और दूसरों को भी सदा हँसाते रहा करो,
लोग तुम्हारे बिना खुद अधूरा समझें, ऐसा ही बन जाया करो॥