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गीतों के चितेरे चंचल रिझवानी चले गए…

श्रद्धांजलि...

इन्दौर (मप्र)।

शहर के हिन्दी साहित्य के कुशल चितेरे ‘साहित्य कलश’ के संस्थापक कवि चंचल रिझवानी ईश्वर की दुनिया की ओर चले गए हैं। साहित्य कलश परिवार को ही नहीं, अपितु समूचे साहित्य जगत को चंचल जी के जाने से बड़ी क्षति हुई है।
पाकिस्तान के सिन्ध प्रान्त के शहदादपुर में जन्मे चंचल जी ने ‘काव्य कुंज’ पत्रिका के प्रकाशक रहते हुए कई नवांकुर व स्थापित कवियों को प्रकाशित किया। रुबाईयों और गीतों के राजा चंचल जी चित्रों व शब्दों से चित्रकाव्य की रचनाओं के कुशल सर्जक थे। उन्होंने लगभग ढाई लाख रुबाई रची हैं। चंचल जी को उनके बाल मन से फक्कड़ एवं मस्त मौला स्वभाव के कारण भी सबसे अलग और अधिक याद किया जाएगा। उन्होंने सिन्धीभाषी होते हुए भी हिन्दी की प्राण-पण से जो सेवा की है, वह अनिर्वाच्य है। उन्होंने साहित्य कलश के माध्यम से देश -प्रदेश के हिन्दी साहित्य के कई उन गुमनाम व स्थापित साहित्यकारों को सम्मानित किया, जिन्हें सदैव दूर रखा गया। वे बहुत उच्चकोटि के भावुक गीतकार व कवि ही नहीं थे, अपितु अनूठे चित्रकार भी थे। कई दृष्टियों से चंचल जी का कोई सानी नहीं था। म.प्र. सिन्धी साहित्य अकादमी के पुरस्कार के साथ ही देश और नगर की कई संस्थाओं ने उनको कई बार सम्मानित किया। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री ने चंचल जी को इस वर्ष भी ‘इन्दौर गौरव सम्मान-२०२२’ से सम्मानित किया था।हिंदीभाषा.कॉम परिवार उन्हें सादर श्रद्धांजलि अर्पित करता है।

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