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जय मातृभूमि जन गण भारत

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’
बेंगलुरु (कर्नाटक)
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संक्रांति विशेष…

सब ओल्ड / डॉ. राम कुमार झा “निकुंज”
नई दिल्ली/
विधाः पद्य/टैग-/

शीर्षकः

जय मातृभूमि जन गण भारत,
लो उत्तरायण अरुणाभ किरण
मकर संक्रान्ति उत्सव पावन,
बिहू लोहड़ी पोंगल भारत।

अरुणिम प्रभात रविभोर किरण,
गणतंत्र लसित समरस भावन
चहुँ शस्य श्यामला हरित भरित,
बलिदान प्राण अर्जित भारत।

चहुँ नृत्य गीत संगीत मगन,
पा आशीष तिल पितु गुरुजन
सब पापशमन लोहड़ी अनल,
आलोक खुशी खिलता भारत।

चहुँ हॅंसित धरा मुस्कान कृषक,
सीमांत शौर्य जय सत्प्रेरक
रिपुदमन नाथूला अरुणाचल,
लद्दाख द्रास विजयी भारत।

संस्कृति खिचड़ी जनमत समरस,
बहु भाषा सहस्त्र भागीरथ
बहु जाति धर्म सद्भाव सहज,
अपनापन रिश्तों का भारत।

ललना शोभित नित गगन क्षितिज,
चंदा मंगल पा सुता मुदित,
विज्ञान ज्ञान नव शोध सृजित
विश्वगुरु पुनः विकसित भारत।

जग शौर्य शक्ति प्रतिमूर्ति वतन,
भ्रातृत्व सुधा सुरभित है चमन
संदेश शान्ति सुख प्रेम रमण,
धन वैभव समतामम भारत।

बहु सोच पृथक बहु सोच मिथक,
पर एक संघ चालित सार्थक
वैविध्य प्रथा, पर एक वतन,
नवरत्न ललित जनमत भारत।

गतिमान प्रगति रच समय चक्र,
चहुँ विकास सबल मुस्कान फ़क्र
नीलाभ चित्त निर्मल निश्छल,
स्वाभिमान तिरंगा नभ भारत।

जहॅं संविधान जनतंत्र मंत्र,
गणतंत्र अटल तकनीक यंत्र
अधिकार मूल कर्त्तव्य सृजन,
नीति-रीति न्याय सुगम भारत।

हम शान्ति दूत, पर क्रांति प्रलय,
दावानल शत्रुंजय, सदा सदय
ममतांचल करुणा क्षमा हृदय,
सद्मीत संवेदना भारत।

गंगा यमुना तहज़ीब ललित,
जहॅं देवतुल्य गिरि सरित लसित,
कानन तरु पादप पत्र पूजित,
सुर प्रकृति वेद गायक भारत।

परमार्थ भाव पौरुष अविरत,
अभिवादन गुरुजन शील विनत
सोलह श्रंगार संस्कार निरत,
गीता-सीता अभिमत भारत।

सिद्धान्त अचल नित सत्य मुखर,
कर्मवीर लक्ष्य सोपान शिखर,
शीतोष्णसुखदुःख वृष्टि निखर,
मधुमास लसित खुशियाँ भारत।

रच कीर्ति धवल तिरंगा ध्वज,
आन शान रख भारत पद रज
नौनिहाल वतन खुशहाल चमन,
रोजगार सुलभ युवा भारत।

अपमान विरत सम्मान सकल,
वरदान ईश भारत मंगल
लावण्य प्रकृति नि:स्वार्थ विमल,
समुदार चरित गौरव भारत।

मर्यादित भारत हम पुरुषोत्तम,
त्यागमूर्ति भरत जग सर्वोत्तम
हम लखन भक्ति मन प्रेम जड़ित,
शत्रुघ्न प्रशासित हम भारत।

पुरुषार्थ धर्म नित कर्म फलित,
विधिलेख कर्म संयोग ललित
लेखन स्वर्ण कथा नित उद्वेलित,
संक्रान्ति मकर रचता भारत।

हम कामधेनु सिंहासन शुभ,
नवशक्ति नार्य विकराल रूप
हिय छाॅंव करुण उर क्षीर मधुर,
ममता जननी वसुधा भारत।

उन्मुक्त डोर जीवन पतंग,
कब कटे अनिश्चित मुक्त जंग
रच क्षणिक समय सतरंग सुयश,
संयम धीरज मति जन भारत।

स्वादिष्ट दही चुड़वा शीतल,
मृदुभाष हितैषी मुखर विमल
संक्रान्ति मकर मंगल पावन,
गणतंत्र सुखद सरगम भारत।

नर नारायण सच पार्थ सार्थ,
ध्वनि पांचजन्य धर्म रक्षणार्थ
धनुष्टंकार गांडीव समर,
चक्र सुदर्शन धारक भारत।

शिव शक्ति महाकाली त्रिशूल,
मनुज मानवता हो प्रतिकूल
पापमुक्त धरा अधर्म विरत,
बन परशुराम द्विजवर भारत।

हम दानवीर शिबि भोज कर्ण,
महाप्रचेतस दधिचि गोकर्ण
परमार्थ निकेतन कल्याणक,
पी दर्प जलधि नाशक भारत।

हम क्षमाशील नित तीन दिवस,
परीक्षा सहिष्णु न करे विवश
स्वाभिमान शौर्य शर दावानल,
झुकता दुश्मन सागर भारत।

यौवन उमंग पौरुष तरंग,
कॅंटिल दुर्गम बाधा पथ भंग
तोड़े तरुणाई चट्टानें,
तूफ़ानों से लड़ता भारत।

दे साहस बल संवेदित मन,
रवि उत्तरायण अरुणाभ किरण
हो दुर्जेय प्रेम शान्ति सबल,
गणतंत्र तिरंगा जय भारत।

हो बधाईयाँ शुभकाम मकर,
जनगण भारत हो सुखद शिखर
कुसमित कलसी उन्नति बसन्त,
बिहू लोहड़ी पोंगल भारत।

कलकल सरिता वीणा भारत,
सप्तक तारों गूंजे आरत।
शारद वसन्त शुभदे शुक्ले,
भारती ज्ञान मति दे भारत।

परिचय-डॉ.राम कुमार झा का साहित्यिक उपनाम ‘निकुंज’ है। १४ जुलाई १९६६ को दरभंगा में जन्मे डॉ. झा का वर्तमान निवास बेंगलुरु (कर्नाटक)में,जबकि स्थाई पता-दिल्ली स्थित एन.सी.आर.(गाज़ियाबाद)है। हिन्दी,संस्कृत,अंग्रेजी,मैथिली,बंगला, नेपाली,असमिया,भोजपुरी एवं डोगरी आदि भाषाओं का ज्ञान रखने वाले श्री झा का संबंध शहर लोनी(गाजि़याबाद उत्तर प्रदेश)से है। शिक्षा एम.ए.(हिन्दी, संस्कृत,इतिहास),बी.एड.,एल.एल.बी., पीएच-डी. और जे.आर.एफ. है। आपका कार्यक्षेत्र-वरिष्ठ अध्यापक (मल्लेश्वरम्,बेंगलूरु) का है। सामाजिक गतिविधि के अंतर्गत आप हिंंदी भाषा के प्रसार-प्रचार में ५० से अधिक राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय साहित्यिक सामाजिक सांस्कृतिक संस्थाओं से जुड़कर सक्रिय हैं। लेखन विधा-मुक्तक,छन्दबद्ध काव्य,कथा,गीत,लेख ,ग़ज़ल और समालोचना है। प्रकाशन में डॉ.झा के खाते में काव्य संग्रह,दोहा मुक्तावली,कराहती संवेदनाएँ(शीघ्र ही)प्रस्तावित हैं,तो संस्कृत में महाभारते अंतर्राष्ट्रीय-सम्बन्धः कूटनीतिश्च(समालोचनात्मक ग्रन्थ) एवं सूक्ति-नवनीतम् भी आने वाली है। विभिन्न अखबारों में भी आपकी रचनाएँ प्रकाशित हैं। विशेष उपलब्धि-साहित्यिक संस्था का व्यवस्थापक सदस्य,मानद कवि से अलंकृत और एक संस्था का पूर्व महासचिव होना है। इनकी लेखनी का उद्देश्य-हिन्दी साहित्य का विशेषकर अहिन्दी भाषा भाषियों में लेखन माध्यम से प्रचार-प्रसार सह सेवा करना है। पसंदीदा हिन्दी लेखक-महाप्राण सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’ है। प्रेरणा पुंज- वैयाकरण झा(सह कवि स्व.पं. शिवशंकर झा)और डॉ.भगवतीचरण मिश्र है। आपकी विशेषज्ञता दोहा लेखन,मुक्तक काव्य और समालोचन सह रंगकर्मी की है। देश और हिन्दी भाषा के प्रति आपके विचार(दोहा)-
स्वभाषा सम्मान बढ़े,देश-भक्ति अभिमान।
जिसने दी है जिंदगी,बढ़ा शान दूँ जान॥ 
ऋण चुका मैं धन्य बनूँ,जो दी भाषा ज्ञान।
हिन्दी मेरी रूह है,जो भारत पहचान॥

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