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ज़िन्दगी

डॉ.अशोक
पटना(बिहार)
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कौन हूँ क्या हूँ और यहां क्यों हूँ,
है यह ज़िन्दगी की एक परिभाषा
अपने-आपको यह पहचानने की,
देती है खुशियाँ बनकर
जीवन की अभिलाषा।

अपने-आपको पहचानने का,
सुन्दर अनमोल हुनर है
सामाजिकता का देता भाव,
दिखता अपूर्व सुन्दर है।

स्वयं को पहचानने का है,
एक अनूठा अमृत रूप
जनमानस पर एतबार का है,
विशिष्ट अद्भुत प्रारूप।

ज़िन्दगी ईश्वर का दिया ,
सुन्दर नजराना है
प्रगति पथ पर अग्रसर,
बढ़ते रहने का तराना है।

ज़िन्दगी एक खेल है,
सदैव खेलते रहना है
ज़िन्दगी एक कर्तव्य है,
सदैव तत्पर हमें रहना है।

दुःख,हार व असफलता,
ज़िन्दगी का एक सार है
नवजीवन ज़िन्दगी को,
इस क्षण की दरकार है।

मुस्कुराहट ज़िन्दगी में एक,
सुन्दर उपहार है
गम्भीरता त्याग कर ज़िन्दगी में,
सुकून लाना उत्तम संस्कार है।

ज़िन्दगी एक तरफ है,
सारे जहां से अनजान
सारा सच तू खूब है,
बना दी है ज़िन्दगी की,
अब महत्वपूर्ण पहचान।

सकारात्मक क़दम उठाने से,
सोच-विचार उत्तम हो जाती है
ज़िन्दगी की कठिन डगर में भी,
सुरक्षित जमा पूंजी बन जाती है।

गलती माफ़ करने की योग्यता,
यहां दिखता उन्नत राजधर्म है
भावनाओं पर काबू पाने का,
सिखलाता एक सुंदर कर्म है।

स्वयं से प्रेम करने का है यह,
महत्वपूर्ण जानकारी जैसे धर्म
गलतियों को सदैव माफ़ करने,
की बात बतलाता बनकर युगधर्म।

ज़िन्दगी जीवन की डोर है,
जीना हमें संसार में सिखाता है
अपनी दृष्टि और विवेक का,
अनमोल पाठ खूब पढ़ाता है।

ज़िन्दगी में प्यार शिक्षा प्रेम,
सुन्दर पावन त्योहार है
परिवार प्यार शिक्षा का यहां,
दिखता सुन्दर संस्कार है।

दिल की बात सुनकर,
मजबूत पक्ष रखने की
उत्तम उपचार वाली,
सहर्ष स्वीकार्य बात हो
तुलना से दूर रहकर,
विनय विवेक की जिंदगी में
अब त्वरित शुरुआत हो।

ज़िन्दगी में ज़िन्दगी के,
व्यस्तम कठीन सफ़र में
हरपल यहां खूब खुशियाँ,
बटोरने कीमती सौगात हो
सकारात्मक क़दम ज़िन्दगी में,
उठाने वालीं खूब बरसात हो।

स्वीकारना ही है ज़िन्दगी का,
खूबसूरत सबब दिखता यहां
उन्नति प्रगति पथ पर बढ़ने का,
रूख करता सदैव दिखता यहां।

ज़िन्दगी के हर पल में साँस हरपल,
लगातार कमजोर होती जाती दिखती है
जीवन के महत्वपूर्ण पल की एक रात,
धरती पर खत्म करती जाती दिखती है।

खुशियाँ बटोरने में यह,
ज़िन्दगी ज़िन्दगी-सी है
दोस्तों को दरकिनार कर,
ज़िन्दगी बोरियत-सी है।

सारे सच का है यहां आजकल,
दिखता उत्तम अद्भुत चमत्कार।
ज़िन्दगी पर अब बहस नहीं होती,
जनमानस को अब जिंदगी से यहां
खुशियों संग होने लगा है ऐतबार॥

परिचय-पटना(बिहार) में निवासरत डॉ.अशोक कुमार शर्मा कविता,लेख,लघुकथा व बाल कहानी लिखते हैं। आप डॉ.अशोक के नाम से रचना कर्म में सक्रिय हैं। शिक्षा एम.काम.,एम.ए.(राजनीति शास्त्र,अर्थशास्त्र, हिंदी,इतिहास,लोक प्रशासन एवं ग्रामीण विकास) सहित एलएलबी,एलएलएम,सीएआईआईबी, एमबीए व पीएच-डी.(रांची) है। अपर आयुक्त (प्रशासन)पद से सेवानिवृत्त डॉ. शर्मा द्वारा लिखित अनेक लघुकथा और कविता संग्रह प्रकाशित हुए हैं,जिसमें-क्षितिज,गुलदस्ता, रजनीगंधा (लघुकथा संग्रह) आदि है। अमलतास,शेफालीका,गुलमोहर, चंद्रमलिका,नीलकमल एवं अपराजिता (लघुकथा संग्रह) आदि प्रकाशन में है। ऐसे ही ५ बाल कहानी (पक्षियों की एकता की शक्ति,चिंटू लोमड़ी की चालाकी एवं रियान कौवा की झूठी चाल आदि) प्रकाशित हो चुकी है। आपने सम्मान के रूप में अंतराष्ट्रीय हिंदी साहित्य मंच द्वारा काव्य क्षेत्र में तीसरा,लेखन क्षेत्र में प्रथम,पांचवां,आठवां स्थान प्राप्त किया है। प्रदेश एवं राष्ट्रीय स्तर के अखबारों में आपकी रचनाएं प्रकाशित हुई हैं।