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ताक़त है आज़मानी आज फिर

अब्दुल हमीद इदरीसी ‘हमीद कानपुरी’
कानपुर(उत्तर प्रदेश)
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साथ मिलकर ईद होली है मनानी आज फिर।
प्यार की गंगा हमें यारों बहानी आज फिर।

खोल दी है याद की इक इत्रदानी आज फिर।
दास्ताने इश्क है उनको सुनानी आज फिर।

एक रूमानी ग़ज़ल है गुनगुनानी आज फिर।
हो गयी है इक ज़रा-सी बदगुमानी आज फिर।

हाँकने फिर से लगे हैं लनतरानी आज फिर।
बात नेता कर रहे हैं आसमानी आज फिर।

आग नफरत की उन्हें शायद लगानी आज फिर।
हो रही इतिहास से है छेड़खानी आज फिर।

है नहीं चर्चा तलक उम्मीदवारी की कहीं,
उसको भारी पड़ रही हैे बदज़बानी आज फिर।

देखकर मौसम सुहाना और तेवर दिल नवाज़,
याद आयी है मुहब्बत की कहानी आज फिर।

ले रहा है इम्तिहां पर इम्तिहां वो रोज़ ही,
प्यार की ताक़त उसे है आज़मानी आज फिर।

जिस कहानी में सभी थे बाप माँ भाई बहन,
याद मुझको आ रही है वो कहानी आज फिर।

बेबसी ही है कराती ऊँचे-नीचे काम सब,
दिख रही ख़तरे उठाती ज़िन्दगानी आज फिर।

उसके आने का असर हर शाख़ पर ऐसा हुआ,
खिल-खिलाकर के हँसी है रातरानी आज फिर।

कुछ नया करके दिखाना चाहती है ज़िन्दगी,
जोश से भरपूर है यारों जवानी आज फिर।

अनगिनत होते यहाँ हैं रेप मर्डर आये दिन,
ज़ुर्म की दिल्ली बनी है राजधानी आज फिर।

दूसरे की बात सुनने को नहीं तैय्यार वो,
सोच उसकी हो गयी है तालिबानी आज फिर।

बेईमानी के लिये जिसको निकाला कल गया,
मुल्क की करने लगा वो बागबानी आज फिर।

है कोई तकलीफ़ ऐसी जिसको कह सकती नहीं,
आँख उसकी दिख रही हैे डबडबानी आज फिर।

क्या लगाऊँ मिसरा ऊला सोचता है अब यही,
हो गया है उससे पहले मिसरा सानी आज फिर।

सुब्ह उठकर काम में मशगूल हो जाओ ‘हमीद’,
धाक अपनी इस जहां में गर जमानी आज फिर।

देखकर तस्वीर तेरी एक एलबम में हमीद,
याद आयी ख़ूबसूरत मेज़बानी आज फिर॥

परिचय : अब्दुल हमीद इदरीसी का साहित्यिक उपनाम-हमीद कानपुरी है। आपकी जन्मतिथि-१० मई १९५७ और जन्म स्थान-कानपुर हैl वर्तमान में भी कानपुर स्थित मीरपुर(कैण्ट) में ही निवास हैl उत्तर प्रदेश राज्य के हमीद कानपुरी की शिक्षा-एम.ए. (अर्थशास्त्र) सहित बी.एस-सी.,सी.ए.आई.आई.बी.(बैंकिंग) तथा  सी.ई.बी.ए.(बीमा) हैl कार्यक्षेत्र में नौकरी(वरिष्ठ प्रबन्धक बैंक)में रहे अब्दुल इदरीसी सामाजिक क्षेत्र में समाज और बैंक अधिकारियों के संगठन में पदाधिकारी हैंl इसके अलावा एक समाचार-पत्र एवं मासिक पत्रिका(उप-सम्पादक)से भी जुड़े हुए हैंl लेखन में आपकी विधा-शायरी(ग़ज़ल,गीत,रूबाई,नअ़त) सहित  दोहा लेखन,हाइकू और निबन्ध लेखन भी हैl प्रकाशित कृतियों की बात की जाए तो-नीतिपरक दोहे व ग़ज़लें,एक टुकड़ा आज,ज़र्रा-ज़र्रा ज़िन्दगी,क्योंकि ज़िन्दा हैं हम(ग़ज़ल संग्रह) तथा मीडिया और हिंदी (लेख संग्रह) आपके नाम हैl आपको सम्मान में ज्ञानोदय साहित्य सम्मान विशेष है,जबकि उपलब्धि में सर्वश्रेष्ठ लेखक सम्मान,पीएनबी स्टाफ जर्नल(पीएनबी,दिल्ली) से सर्वश्रेष्ठ कवि सम्मान भी हैl आपके लेखन का उद्देश्य-समाज सुधार और आत्मसंतुष्टि हैl