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तुम भक्तों के हितकारी

शंकरलाल जांगिड़ ‘शंकर दादाजी’
रावतसर(राजस्थान) 
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विघ्नहर्ता गजानंद विशेष…..

हे गणपति गजबदन विनायक तुम भक्तों के हितकारी,
प्रथम पूज्य हे देव दयानिधि दुःख हरो से दु:ख हारी।
कर प्रणाम मैं करूंँ अर्चना ध्यान धरूंँ तव सुखकारी,
सकल चराचर पूजे तुमको हर जन तुम पर है वारी।

विघ्नविहर्ता मंगलकर्ता ध्यान धरे जगती सारी,
बुद्धि प्रदाता सब सुख दाता अन-धन के तुम भंडारी।

देवी गौरी मात तुम्हारी पितृ देव हैं शिव लहरी,
जटा गंग सिर चन्द्र विराजे वो शिव शँभू त्रिपुरारी।

सब देवों में प्रथम सुपूजित पूज रही दुनिया सारी,
होय उजाला कृपा करें जब जाए बीत निशा कारी।

बदन विशाला देव कृपाला मूषक करते असवारी,
शिव लाला भक्तन प्रतिपाला एक तुम्हीं हो भवतारी।
हे गज आनन हे पंचानन जगती सारी दुखियारी,
‘शंकर’ शरण तिहारी आया कृपा करो हे भयहारी॥

परिचय-शंकरलाल जांगिड़ का लेखन क्षेत्र में उपनाम-शंकर दादाजी है। आपकी जन्मतिथि-२६ फरवरी १९४३ एवं जन्म स्थान-फतेहपुर शेखावटी (सीकर,राजस्थान) है। वर्तमान में रावतसर (जिला हनुमानगढ़)में बसेरा है,जो स्थाई पता है। आपकी शिक्षा सिद्धांत सरोज,सिद्धांत रत्न,संस्कृत प्रवेशिका(जिसमें १० वीं का पाठ्यक्रम था)है। शंकर दादाजी की २ किताबों में १०-१५ रचनाएँ छपी हैं। इनका कार्यक्षेत्र कलकत्ता में नौकरी थी,अब सेवानिवृत्त हैं। श्री जांगिड़ की लेखन विधा कविता, गीत, ग़ज़ल,छंद,दोहे आदि है। आपकी लेखनी का उद्देश्य-लेखन का शौक है