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दस इंद्रियां प्रतिबद्ध कर

ममता तिवारी ‘ममता’
जांजगीर-चाम्पा(छत्तीसगढ़)
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विजयादशमी विशेष…

घन नैराश्य,निशा अंत हो,
घृणा द्वेष विजित छोड़ कर
शत्रु भाव का पराभव हो,
भस्म करो मन अरि तोड़ कर।
पर्व विजय दशम दैदीप्त हो,
दसकंधर के कंध मरोड़कर…॥

अन्तरिन्द्रीय जंजीर से,
दस इंद्रियां प्रतिबद्ध कर
दस दिशा की वृत परिधि,
दसो द्वार मन के खोल कर
दस ज्ञान पवन आने दो,
दस अज्ञान से मुख मोड़कर।
दशमी तिथि दैदीप्त हो मन,
दसकंधर के कंध मरोड़ कर…॥

दस दान में प्रवित्त हो मन,
दस दर्प-सर्प को छोड़कर
दस मन द्वारपाल भोग दे,
दस क्षुधाओं को शांत कर
दस गुण को अपना बनाएं,
दस सुभाव को सत्कार कर।
दशमी तिथि दैदीप्य हो मन,
दसकंधर का कंध मरोड़कर…॥

परिचय–ममता तिवारी का जन्म १अक्टूबर १९६८ को हुआ है। वर्तमान में आप छत्तीसगढ़ स्थित बी.डी. महन्त उपनगर (जिला जांजगीर-चाम्पा)में निवासरत हैं। हिन्दी भाषा का ज्ञान रखने वाली श्रीमती तिवारी एम.ए. तक शिक्षित होकर समाज में जिलाध्यक्ष हैं। इनकी लेखन विधा-काव्य(कविता ,छंद,ग़ज़ल) है। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में आपकी रचनाएं प्रकाशित हैं। पुरस्कार की बात की जाए तो प्रांतीय समाज सम्मेलन में सम्मान,ऑनलाइन स्पर्धाओं में प्रशस्ति-पत्र आदि हासिल किए हैं। ममता तिवारी की लेखनी का उद्देश्य अपने समय का सदुपयोग और लेखन शौक को पूरा करना है।

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