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दिलकश था वो नज़ारा

डाॅ. पूनम अरोरा
ऊधम सिंह नगर(उत्तराखण्ड)
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प्रथम प्रेम पाती का पाना,
जोरों से दिल का धड़क जाना
सूने मन में गुलों का खिलना,
प्रत्येक हर्फ़ बार-बार पढ़ना
ख़्वाबों का सत्य हो जाना,
हौले-हौले हृदय में उतरना
बेहद दिलकश था,
प्रभात का वो नज़ारा…।

तुम्हारा मेरे चरणों में बैठना,
मेरा नींद से जग जाना
तुम्हें अपने करीब पा,
ज़ेहन में अनहद नाद बजना
मौन भावों से तुम्हारा,
मेरे अंतर्मन को लुभाना
इबादत में डूबा था,
प्रभात का वो नज़ारा...।

 हौले से मेरे समीप आना,
 मृदुलता से मुझे स्पर्श करना 
 तुम्हारे प्रेम की जगमग लौ में,
 अपना अक्स दिखाई देना 
 बैठकर ढेरों बातें करना,
 और फिर तुम्हारा लौट जाना 
  कितना सुहाना था,
  प्रभात का वो नज़ारा...।

प्रेम का अंकुर प्रस्फुटित होना,
इक-दूजे में वुजूद का जज़्ब होना 
आत्मा का आत्मा में मिल जाना,
प्रेम की भूमि औ आकाश पाना
गुलाबी आँखों से छलकते,
इश़्क में डूबे जाम को पीना।
 बेहद मदमस्त था,
 प्रभात का वो नज़ारा...॥

परिचय–उत्तराखण्ड के जिले ऊधम सिंह नगर में डॉ. पूनम अरोरा स्थाई रुप से बसी हुई हैं। इनका जन्म २२ अगस्त १९६७ को रुद्रपुर (ऊधम सिंह नगर) में हुआ है। शिक्षा- एम.ए.,एम.एड. एवं पीएच-डी.है। आप कार्यक्षेत्र में शिक्षिका हैं। इनकी लेखन विधा गद्य-पद्य(मुक्तक,संस्मरण,कहानी आदि)है। अभी तक शोध कार्य का प्रकाशन हुआ है। डॉ. अरोरा की दृष्टि में पसंदीदा हिन्दी लेखक-खुशवंत सिंह,अमृता प्रीतम एवं हरिवंश राय बच्चन हैं। पिता को ही प्रेरणापुंज मानने वाली डॉ. पूनम की विशेषज्ञता-शिक्षण व प्रशिक्षण में है। इनका जीवन लक्ष्य-षड दर्शन पर किए शोध कार्य में से वैशेषिक दर्शन,न्याय दर्शन आदि की पुस्तक प्रकाशित करवाकर पुस्तकालयों में रखवाना है,ताकि वो भावी शोधपरक विद्यार्थियों के शोध कार्य में मार्गदर्शक बन सकें। कहानी,संस्मरण आदि रचनाओं से साहित्यिक समृद्धि कर समाजसेवा करना भी है। देश और हिंदी भाषा के प्रति विचार-‘हिंदी भाषा हमारी राष्ट्र भाषा होने के साथ ही अभिव्यक्ति की सरल एवं सहज भाषा है,क्योंकि हिंदी भाषा की लिपि देवनागरी है। हिंदी एवं मातृ भाषा में भावों की अभिव्यक्ति में जो रस आता है, उसकी अनुभूति का अहसास बेहद सुखद होता है।