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दुनिया रंग-बिरंगी

वाणी वर्मा कर्ण
मोरंग(बिराट नगर)
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एक दिन की बात है,
चुन्नू पूछ बैठा दादाजी से
कहो तो दादा जी ऐसा क्यों होता है,
कोई काला कोई गोरा क्यों होता है
कोई पेड़ छोटा तो कोई लम्बा तार क्यों होता है,
कहो तो दादा जी ऐसा क्यों होता है
सब क्यों अलग-थलग से होते हैं।

चुन्नू की बात सुनकर,
दादाजी सोच में आए
क्या जबाब दें समझ न पाए,
सर खुजाते बोले सुनो चुन्नू
शायद भगवान को उनकी मम्मी ने,
कोई चित्र बनाने को दिया
भगवान भी थे तुम जैसे शैतान,
किसी को बड़ा तो किसी को छोटा बनाया
किसी को गोरा तो किसी को काला बनाया,
इस संसार को रंग-बिरंगा बनाया
एक जैसे जो सब होते,
तो कैसे पहचानता चुन्नू
कौन पशु कौन पक्षी,
कौन आम कौन लीची,
सुंदर दिखाने के लिए ही
इस पृथ्वी को रंगीन बनाया,
प्यारे बच्चों को लाकर यहां
इस पृथ्वी को फूलों से सजाया।

चुन्नू जबाब सुनकर हुआ खुश,
गले लगकर दादाजी के
बोला चलो दादाजी,
हम भी कुछ पेड़ पौधे लगाते हैं,
इस दुनिया को रंगीन बनाते हैं॥

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