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धरती माँ की करुण कहानी

डॉ.नीलिमा मिश्रा ‘नीलम’ 
इलाहाबाद (उत्तर प्रदेश)

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विश्व धरा दिवस स्पर्धा विशेष………

धरती माँ की करुण कहानी,
ग्लोबल वार्मिंग तुम्हें बतानी।

रोज काटते पेड़ अनेक,
क्षरित हो रहे पर्वत देखो
अतिवृष्टि और अनावृष्टि से,
असंतुलित है जग का पानी।
धरती माँ की करुण कहानी…॥

जनसंख्या विस्फोट हुआ है,
नदियों का जल मलिन हुआ है
कार्बन स्तर बढ़ता जाता,
श्वास नि:श्वास में है हैरानी।
धरती माँ की करुण कहानी…॥

बर्फ़ हिमानी पिघल रही है,
तट समुद्र के निगल रही है
सागर के सब जीव हैं व्याकुल,
रक्षण की है जुगत बनानी।
धरती माँ की करुण कहानी…॥

जंगल कटते जाते हैं सब,
जलवायु परिवर्तन है अब
आँधी-तूफ़ान रोज हैं आते,
रोको अब तो तुम मनमानी।
धरती माँ की करुण कहानी…॥

उद्योगों का बढ़ते जाना,
वायु प्रदूषण रोज बढ़ाना
तापव़ृद्धि का कारण जानो,
मन में चिंता यही समानी।
धरती माँ की करुण कहानी…॥

वृक्ष लगाओ इंच इंच पर,
जले न पत्ते किंच किंच भर
पत्तों से कम्पोस्ट बनाओ,
नयी बात तुमको बतलानी।
धरती माँ की करुण कहानी…॥

चारों तरफ खुशी छा जाये,
जीवन धरा पे खिलता जाये
राह सृजन की पकड़ो ऐसी,
धरती माता तुम्हें बचानी।
धरती माँ की करूण कहानी,
ग्लोबल वार्मिंग तुम्हें बतानी॥

परिचय-डॉ.नीलिमा मिश्रा का साहित्यिक नाम नीलम है। जन्म तारीख १७ अगस्त १९६२ एवं जन्म स्थान-इलाहाबाद है। वर्तमान में इलाहाबाद स्थित साउथ मलाका (उत्तर प्रदेश) बसी हुई हैं। स्थाई पता भी यही है। आप एम.ए. और पी-एच.डी. शिक्षित होकर केन्द्रीय विद्यालय (इलाहाबाद) में नौकरी में हैं। सामाजिक गतिविधि के निमित्त साहित्य मंचन की उपाध्यक्ष रहीं हैं। साथ ही अन्य संस्थाओं में सचिव और सदस्य भी हैं। इनकी लेखन विधा-सूफ़ियाना कलाम सहित ग़ज़ल,गीत कविता,लेख एवं हाइकु इत्यादि है। एपिग्रेफिकल सोसायटी आफ इंडिया सहित कई पत्र-पत्रिका में विशेष साक्षात्कार तथा इनकी रचनाओं का प्रकाशन हो चुका है। ब्लॉग पर भी लिखने वाली डॉ. मिश्रा की विशेष उपलब्धि-विश्व संस्कृत सम्मेलन (२०१५,बैंकाक-थाईलैंड)और कुम्भ मेले (प्रयाग) में आयोजित विश्व सम्मेलन में सहभागिता है। लेखनी का उद्देश्य-आत्म संतुष्टि और समाज में बदलाव लाना है। आपके लिए प्रेरणा पुंज-डॉ. कलीम कैसर हैं। इनकी विशेषज्ञता-ग़ज़ल लेखन में है,तो रुचि-गायन में रखती हैं।