कुल पृष्ठ दर्शन : 383

You are currently viewing परमात्मा के वादे

परमात्मा के वादे

मुकेश कुमार मोदी
बीकानेर (राजस्थान)
**************************************************

संग हूँ जब मैं तुम्हारे, कुछ भी नहीं असम्भव,
हाथ थाम लो मेरा, तब होगा सब कुछ सम्भव।

याद करे जो मुझे निरन्तर, सुख ही वो पाएगा,
जीवन का हर संघर्ष उसे, खेल नजर आएगा।

आए कोई भी विघ्न, मनोबल मत गिरने देना,
ध्यान लगाकर मेरा तुम, हर राय मुझसे लेना।

तुझे बढ़ाना होगा, हिम्मत का एक ही कदम,
मदद के मैं बढ़ाऊंगा, तेरी और हजार कदम।

बीती हुई बातों को, निकल दो मन से अपने,
शक्ति दूंगा तुझको, पूरे करने को सब सपने।

किसी बात का बोझ, लेकर कभी ना चलना,
सब चिन्ताएं मुझे देकर, हल्के होकर चलना।

उलझी हुई हर समस्या, मेरे हाथों में तुम देना,
बेफिक्र होकर तुम, समाधान मुझसे ही लेना।

मन में भय पैदा करके, मत होना तुम मायूस,
अपने सर पर मेरा हाथ, करना सदा महसूस।

रोज शान्ति में बैठकर, मुझसे तुम बतियाना,
अपने सभी प्रश्नों का, उत्तर भी मुझसे पाना।

तेरे जीवन का हर दिन, मैं आसान बनाऊंगा,
आशीर्वाद में तुझे, सर्वशक्तियाँ देता जाऊंगा।

परिस्थितियाँ देखकर, यूँ निराश ना हो जाना,
खुद में आस जगाकर, औरों में आस जगाना।

अपनी गलतियों का कभी, शोक नहीं मनाना,
सुधारकर उनको फिर से, आगे कदम बढ़ाना।

निर्विघ्न होने की युक्ति, मैं ही तुम्हें सिखाऊंगा,
विघ्न रूपी हर पत्थर, मैं ही पथ से हटाऊंगा।

संभले ना जो जिम्मेदारी, वो मैं खुद उठाऊंगा,
तेरे लिए हर समस्या को, मैं आसान बनाऊंगा।

हाथ थामकर मेरा यदि, निरंतर चलता जाएगा,
सुन्दर और उज्ज्वल, तेरा भविष्य बन जाएगा।

कोई और जाने ना जाने, मुझको पूरी पहचान,
नजर आते हैं मुझको तेरी, खूबियों के निशान।

किसी के कुछ कहने से, तुम खुशी ना गंवाना,
मेरी श्रीमत पर ही तुम, अपना जीवन बनाना।

अकेला तुम्हें ना छोडूंगा, संग रहूंगा सदाकाल,
रख भरोसा मुझ पर, कर दूंगा तुझे मालामाल॥

परिचय – मुकेश कुमार मोदी का स्थाई निवास बीकानेर में है। १६ दिसम्बर १९७३ को संगरिया (राजस्थान)में जन्मे मुकेश मोदी को हिंदी व अंग्रेजी भाषा क़ा ज्ञान है। कला के राज्य राजस्थान के वासी श्री मोदी की पूर्ण शिक्षा स्नातक(वाणिज्य) है। आप सत्र न्यायालय में प्रस्तुतकार के पद पर कार्यरत होकर कविता लेखन से अपनी भावना अभिव्यक्त करते हैं। इनकी विशेष उपलब्धि-शब्दांचल राजस्थान की आभासी प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक प्राप्त करना है। वेबसाइट पर १०० से अधिक कविताएं प्रदर्शित होने पर सम्मान भी मिला है। इनकी लेखनी का उद्देश्य-समाज में नैतिक और आध्यात्मिक जीवन मूल्यों को पुनर्जीवित करने का प्रयास करना है। ब्रह्मकुमारीज से प्राप्त आध्यात्मिक शिक्षा आपकी प्रेरणा है, जबकि विशेषज्ञता-हिन्दी टंकण करना है। आपका जीवन लक्ष्य-समाज में आध्यात्मिक और नैतिक मूल्यों की जागृति लाना है। देश और हिंदी भाषा के प्रति आपके विचार-‘हिन्दी एक अतुलनीय, सुमधुर, भावपूर्ण, आध्यात्मिक, सरल और सभ्य भाषा है।’

Leave a Reply