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पानी -पानी

ममता तिवारी
जांजगीर-चाम्पा(छत्तीसगढ़)
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मर जाता कई आँख का पानी,
कोई शर्म से पानी-पानी
पानी कहानी कितनी पनीली,
लिखते कोई पानी में पानी।

मुस्कान कभी है आँसू पानी,
जीवन और मृत्यु है पानी
पानी बिना मूल्यहीन आदमी,
अनमोल है बेमोल ये पानी।

बहता कहीं-कहीं जमता पानी,
कितना सरल-तरल कठोर पानी
इसका मन बढ़ने का जब आगे,
रोक नहीं सकता कोई पानी।

आसमान ठहरा पानी-पानी,
सागर गागर पर पानी-पानी
प्यासा समझे पानी क्या होता,
समुंदर उतर जो तरसा पानी।

तन अंदर बाहर पानी-पानी
सारे ही खेल करे यह पानी।
थाली का भोजन भी तो बनता,
बादल में भटका अटक पानी॥

परिचय–ममता तिवारी का जन्म १अक्टूबर १९६८ को हुआ है। वर्तमान में आप छत्तीसगढ़ स्थित बी.डी. महन्त उपनगर (जिला जांजगीर-चाम्पा)में निवासरत हैं। हिन्दी भाषा का ज्ञान रखने वाली श्रीमती तिवारी एम.ए. तक शिक्षित होकर समाज में जिलाध्यक्ष हैं। इनकी लेखन विधा-काव्य(कविता ,छंद,ग़ज़ल) है। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में आपकी रचनाएं प्रकाशित हैं। पुरस्कार की बात की जाए तो प्रांतीय समाज सम्मेलन में सम्मान,ऑनलाइन स्पर्धाओं में प्रशस्ति-पत्र आदि हासिल किए हैं। ममता तिवारी की लेखनी का उद्देश्य अपने समय का सदुपयोग और लेखन शौक को पूरा करना है।

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