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प्रकाशन क्षेत्र में सहायक है ‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता’- डॉ. पाल

दिल्ली।

आज का युग तकनीकी युग है। हमें उपलब्ध तकनीक का उपयोग सावधानीपूर्वक अपने कार्य में करना चाहिए। कृत्रिम बुद्धिमत्ता आज के डिजिटल युग की नवीनतम तकनीक है।प्रकाशन के क्षेत्र में इसका उपयोग विशेष रूप से लाभदायक सिद्ध हो सकता है। पुस्तक का रूप चाहे भौतिक रूप में हो अथवा आभासी, सदैव ज्ञानार्जन की आवश्यकता बना रहेगा।
प्रख्यात साहित्यकार और नागरी लिपि परिषद के महामंत्री डॉ. हरिसिंह पाल ने अखिल भारतीय हिंदी प्रकाशक संघ के ६०वें वार्षिक अधिवेशन की अध्यक्षता करते हुए व्यक्त किए। मुख्य अतिथि नागरिक उड्डयन महानिदेशालय के संयुक्त महानिदेशक जयप्रकाश पांडेय रहे। पूर्व अधीक्षण अभियंता डॉ. प्रदीप गुप्ता के कुशल संचालन में अधिवेशन का शुभारंभ करते हुए अतिथियों द्वारा हिंदी बुक सेंटर के अध्यक्ष अनिल कुमार वर्मा को श्रेष्ठ प्रकाशक सम्मान दिया गया। संघ अध्यक्ष ओमप्रकाश अग्रवाल ने मुख्य अतिथि का और महामंत्री सौरभ शर्मा ने डॉ. पाल का स्वागत किया।
चर्चा सत्र के अंतर्गत ‘हिंदी प्रकाशन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका’ विषय पर दूरदर्शन के पूर्व अधिकारी डॉ. अजय कुमार ओझा, नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति गाजियाबाद के सदस्य सचिव ललित भूषण ने भाग लिया। उत्तराखंड विवि की प्राध्यापक डॉ. ब्रजलता शर्मा ने विषय का प्रतिपादन किया।