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बार-बार हिन्दी दिवस मनाया जाना चाहिए

हिन्दी पखवाड़ा-सह-पुस्तक चौदस मेला…

पटना (बिहार)।

यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि भारत के विद्यार्थियों के मन में एक हीन-भावना आ रही है। वे ये समझने लगे हैं कि अंग्रेज़ी के बिना हम पीछे रह जाएँगे। इस कारण से हिन्दी के प्रति जो उनके मन में आदर की भावना होनी चाहिए थी, वह नहीं रह जाती। इसलिए यह आवश्यक है कि बार-बार हिन्दी दिवस मनाया जाना चाहिए।
समारोह की मुख्य अतिथि और चाणक्य राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय की कुलपति न्यायमूर्ति मृदुला मिश्र ने यह बात कही। अवसर रहा ‘हिन्दी दिवस’ के उपलक्ष्य में १ सितम्बर से बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन द्वारा सम्मेलन सभागार में ‘हिन्दी पखवारा-सह-पुस्तक चौदस मेला’ के आयोजन का, जिसका उद्घाटन केन्द्रीय वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने किया। मुख्य अतिथि के रूप में न्यामूर्ति सहित बिहार के उद्योग मंत्री समीर कुमार महासेठ भी उपस्थित रहे।
सम्मेलन अध्यक्ष डॉ. अनिल सुलभ ने बताया कि १४ सितम्बर को १४ हिन्दी सेवियों को सम्मानित भी किया जाएगा। १५ सितम्बर को पखवारा के समापन समारोह में विभिन्न प्रतियोगिताओं में सफल छात्र-छात्राओं को पुरस्कृत किया जाएगा। आपने बताया कि, सम्मेलन द्वारा प्रकाशित पुस्तकें एवं स्थानीय लेखकों की पुस्तकें विक्रय व प्रदर्शन हेतु, साथ ही अनेक दुर्लभ ग्रंथों की भी प्रदर्शनी लगाई गई है।
इस अवसर पर डॉ. सुलभ, मंत्री श्री चौबे एवं श्री महासेठ ने भी अपनी बात रखी। सम्मेलन के उपाध्यक्ष एवं वरिष्ठ लेखक जिया लाल आर्य, डॉ. कल्याणी कुसुम सिंह, पंकज वसंत, आराधना प्रसाद, अभिजीत कश्यप तथा कुमार अनुपम ने भी विचार व्यक्त किए।
अतिथियों का स्वागत सम्मेलन के प्रधानमंत्री डॉ. शिववंश पाण्डेय ने किया।
आयोजन समिति-उपाध्यक्ष तथा प्रवक्ता बिन्देश्वर प्रसाद गुप्ता ने बताया कि, श्री चौबे ने हिन्दी के चर्चित कवि डॉ. पंकज वसंत के काव्य-संग्रह ‘अबकी बार मधुमास मौन है’ का लोकार्पण भी किया। इस अवसर पर वरिष्ठ कवि बच्चा ठाकुर, आर.पी. घायल, पूनम आनंद, श्याम बिहारी प्रभाकर सहित अन्य प्रबुद्धजन उपस्थित रहे।
धन्यवाद ज्ञापन डॉ. मधु वर्मा ने दिया। मंच संचालन उपाध्यक्ष डॉ. शंकर प्रसाद ने किया।