भिलाई (छग)।
कमलेश चंद्राकर सिद्धहस्त बालकवि हैं। बाल कविता लिखने वाले को निर्मल मन वाला होना चाहिए। बाल साहित्य एक तरह से लांचिंग पैड है, जिसके सहारे बच्चा बाद में बड़ों की साहित्यिक दुनिया में प्रवेश करता है।
यह बात प्रसिद्ध साहित्यकार गिरीश पंकज ने विशिष्ट अतिथि के नाते बाल साहित्यकार कमलेश चंद्राकर (भिलाई) की कृति ‘मम्मा मेरी सुनो जरा’ के विमोचन अवसर पर भिलाई के कॉफी हाउस हॉल में कही। मुख्य अतिथि प्रख्यात बाल साहित्यकार डॉ. दिविक रमेश (दिल्ली) ने पुस्तक पर विस्तार के साथ बात रखी। वरिष्ठ साहित्यकार परदेसी राम वर्मा ने अध्यक्षता की, तो अतिथि वक्ता विनोद साव, गुलबीर सिंह भाटिया व डॉ. सुधीर शर्मा रहे।
प्रकाशक सुधीर शर्मा ने कवि को अभिनंदन-पत्र प्रस्तुत किया। इस अवसर पर भिलाई, दुर्ग के अनेक महत्वपूर्ण रचनाकार उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का सुंदर संचालन डॉ. सोनाली चक्रवर्ती ने किया। प्रो. डी.एन. शर्मा ने आभार व्यक्त किया।