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भारत का संविधान है शान

संजय एम. वासनिक
मुम्बई (महाराष्ट्र)
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संविधान, संविधान, संविधान,
क्या है ये यह भारत का संविधान
जिसकी रट लगाये राजा से रंक,
प्रजा से प्रधान कह रहे हैं एक ही विधान।

‘संविधान’ है देश की, सबसे ऊँची शान,
देश को कैसे चलाया जाए उसकी जान
एक किताब में लिख रख है देश का गुमान,
इसमें सबका हक़ लिखा, इसमें सबका मान।

हज़ारों भाषाएं विभिन्न संस्कृति के मोतियों को,
एक सूत्र में पिरोये रखना है इसका काम
धर्म, जाति, मज़हब नहीं, सब हों एक समान,
मिलकर भारत को करें, दुनिया में बलवान।

फर्क नहीं गरीब-अमीर हो या साधु- फ़क़ीर,
आज़ादी का अर्थ है, सबको सब अधिकार
एक व्यक्ति एक मत से चुने अपनी सरकार,
तब ही देश महान हो, दूर रहे अँधियार।

नर-नारी बच्चे-बूढ़े सब रहें एकसाथ,
न्याय, समानता, बंधुता, प्रेम की है ये बात
वैज्ञानिक, सैनिक, शिक्षक जब मिलें साथ,
देश रहे सुरक्षित सदा, हो न कोई घात।

हर व्यक्ति को मिले समान अधिकार,
डॉ. आम्बेडकर का यह, ज्ञान भरा उपहार
जिसने किया देश की जनता पर उपकार,
जिससे चलता देश का, संपूर्ण कारोबार।

मिला हमें जो लिखित ख़ज़ाना,
वो सदा के लिए है अनमोल।
‘संविधान’ की किताब में,
हर बात का है इक मोल॥