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भाव केवल राम हैं, काव्य केवल राम…

कवि सम्मेलन…

पटना (बिहार)।

मातृभाषा हिंदी संगठन के तत्वावधान में बी.डी. पब्लिक स्कूल (बुद्ध कॉलोनी, पटना) के सभागार में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। इसमें सभी कवि-कवियित्रियों ने अपनी रचनाओं से जनसमूह का मन आप्लावित किया।
सम्मेलन में दीप प्रज्वलन अतिथि डॉ. राकेश रंजन के साथ सभी कवियों ने किया। माँ वाणी की वंदना सुरभि जी ने की। सम्मेलन के आगाज़ में ज्योति स्पर्श ने “लिख रही हैं हौंसले से अब कहानी लड़कियाँ, दे रही हर मोड़ पर कुछ-कुछ निशानी लड़कियाँ” पढ़ी तो चंदन द्विवेदी ने “नदियों का समंदर में समाना सबने देखा है, समंदर से लौट आना उसका किसने देखा है”, सुनाकर काव्य के मर्म से चेतना जगाई। कुमार रजत की पंक्ति “तिरा हिज़्र जान ए जां यूँ ही भुलाना है, रफी की अ’वाज़ है, साहिर का गाना है” ने खूब वाहवाही बटोरी। मुकेश ओझा, चंद्रबिंद जी, रश्मि गुप्ता ने भी रचनाएँ पढ़ीं। मंच संचालक की भूमिका में प्रयाग से आए कवि अंबुज ऊषानंदन ने गीत “बेबसी कह रही है रुको मोड़ पर, हौंसलों ने कहा चलते रहना सदा। लाख तूफान रस्ते में आए मगर, दीप ने फिर कहा जलते रहना सदा॥” उकेरा।
आयोजक-संयोजक कवि कुमार लक्ष्मीकांत ने श्री राम को समर्पित होकर पंक्तियां पढ़ी कि “भाव केवल राम हैं, काव्य केवल राम हैं। नदी के बीच बहाव में, नाव केवल राम हैं॥”
संयोजक कुमार लक्ष्मीकांत ने बताया कि सम्मेलन में स्कूल की उपप्राचार्य सुषमा जी सहित बड़ी संख्या में शिक्षक व विद्यार्थी भी उपस्थित रहे। सभी ने तालियों से कवियों का खूब स्वागत किया।

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