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भाषाओं के ज्ञाताओं को सम्मानित करने वाले पुरस्कार पूरे देश में किए जाने चाहिए

🔹नागपुर वासी डॉ. लतिका चावड़ा को ‘बहुभाषा भारती राष्ट्रीय पुरस्कार’

त्रिवेंद्रम (केरल)।

त्रिवेंद्रम (केरल)। भारतीय भाषाओं के ज्ञाताओं को सम्मानित करने वाले ऐसे पुरस्कार पूरे देश में आयोजित किए जाने चाहिए, ताकि भाषाओं के आधार पर राज्यों के गठन के बाद जो दूरी बनी है, उसे भाषिक अध्ययन के माध्यम से पाटा जा सके।
मुख्य अतिथि के रूप में केरल के राज्यपाल राजेन्द्र विश्वनाथ आर्लेकर ने भाषाविद डॉ. लतिका चावड़ा (नागपुर-वर्धा वासी) को ‘बहुभाषा भारती राष्ट्रीय पुरस्कार’ से अलंकृत करने वाले समारोह में यह बात कही। डॉ. चावड़ा को यह सम्मान भारत की अधिकतम भाषाओं व लिपि के जानकार होने के तौर पर १ लाख ₹, अंग

वस्त्र, स्मृति चिह्न और प्रमाण-पत्र के साथ दिया गया। आयोजन में ५० हज़ार ₹, फलक और प्रमाण-पत्र सहित ‘बहुभाषा कैरली पुरस्कार’ पी. एस. संजयकुमार (आटिंगल) को दिया गया।

त्रिवेंद्रम् स्थित केरल हिन्दी प्रचार सभा के सभागार में इस कार्यक्रम की अध्यक्षता परिषद् के उपाध्यक्ष एवं इकाई के अध्यक्ष डॉ. के. सी. अजयकुमार ने की। समारोह में केरल हिन्दी प्रचार सभा के सचिव एड.बी. मधु ने स्वागत भाषण दिया। कार्यक्रम में डॉ.ए.एम. उन्निकृष्णन, डॉ. एस. तंकमणि अम्मा और के.वी. राजशेखरन तथा यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (त्रिवेंद्रम) के क्षेत्रीय प्रबंधक नरेश कुमार वाई. उपस्थित रहे।