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माँ…एक रोटी

विजय कुमार
मणिकपुर(बिहार)

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एक रोटी मुझे तू दे दे माँ,
मेरे पेट की भूख मिटा दे…
कितने दिनों से भूखी हूँ,
फिर भी कभी न रोती हूँ।

अब सहा नहीं जाता है माता,
कैसे तुम्हें बताऊँ ?
चन्द घण्टों की बात नहीं,
कब तक तुमसे छुपाऊं।

बेटी थोड़ा कर ले इंतजार,
रोटी वाले भैया आएंगे अपने द्वार..
फिर पहली रोटी तुम्हें देकर,
और करेंगे प्यार।

शाम हो चुकी है मैया,
अब छोड़ो रोटी का इंतजार…
लगता है भगवान भी,
नहीं करेंगे बेड़ा पार।

बेटी निराशा में तू आशा कर,
माँ की ममता पर भरोसा कर…
ऐसी दुखद घड़ी में भी,
हौंसला रख और हिम्मत कर।

कुछ देर बाद जागी आस,
आई जब एक आवाज…
रोटी ले लो,रोटी ले लो,
एक बची है आजll

परिचय-विजय कुमार का बसेरा बिहार के ग्राम-मणिकपुर जिला-दरभंगा में है।जन्म तारीख २ फरवरी १९८९ एवं जन्म स्थान- मणिकपुर है। स्नातकोत्तर (इतिहास)तक शिक्षित हैं। इनका कार्यक्षेत्र अध्यापन (शिक्षक)है। सामाजिक गतिविधि में समाजसेवा से जुड़े हैं। लेखन विधा-कविता एवं कहानी है। हिंदी,अंग्रेजी और मैथिली भाषा जानने वाले विजय कुमार की लेखनी का उद्देश्य-सामाजिक समस्याओं को उजागर करना एवं जागरूकता लाना है। इनके पसंदीदा लेखक-रामधारीसिंह ‘दिनकर’ हैं। प्रेरणा पुंज-खुद की मजबूरी है। रूचि-पठन एवं पाठन में है।

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