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माँ है सर्वत्र

डॉ.अशोक
पटना(बिहार)
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मातृ दिवस विशेष….

माँ है सर्वत्र निराली,
हर घर की है हरियाली
माँ है हर पल मन में यहां,
लगती दिखती भरपूर निराली।

माँ है पृथ्वी क़ा एक अनमोल नूर,
करती हर पल संघर्ष
अपने बच्चों के लिए हरपल दिखती,
बनकर एक मजबूत गुरूर।

माँ अमृत की धारा है,
सर्वत्र स्वीकार्य एक सहारा है
माँ की महिमा सुन्दर उज्वल,
लगती अपरम्पार आधार देती
सुखद अहसास का अखाड़ा है।

दुनिया में नहीं कोई इंसान का,
माँ से है बड़ा खेवनहार यहां
माँ उपवन है माँ यौवन है,
माँ है सबसे उन्नत प्यार यहां।

नवीनतम संस्करण दिखती है,
जैसे अद्भुत उपहार यहां
साथ ही रहती सबके,
हरक्षण बनकर एक अवतार यहां।

माँ की माया अनन्त काल तक,
लगती दिखती सुन्दर जैसे एक माया
जगत संसार में खूब उत्साह से,
सबमें दिखता है यहां पर
माँ बन कर दिखती जैसे हो एक उत्तम काया।

दुःख-सुख से जीवन में,
बच्चों की है माँ एक संस्कार यहां।
माँ के संग यहां,
मिलता है भरपूर प्यार व दुलार यहां।

माँ की ममता सदैव है,
लगती दिखती है यहां सब पर भारी
माँ-सा कोई ना दूजा,
जन्नत-सी खूबसूरत दिखती है न्यारी।

मुसीबतों में भी है माँ यहां,
एक अपूर्व प्यार
लड़ जाती है हर दिक्कत से,
पृथ्वी पर सबसे सर्वोत्तम उपहार।

माँ है तो फिर जीवन है सुन्दर,
नहीं दिखाई देता
यहां कोई नहीं माँ से है,
यहां कोई भी है बेहतर।

माँ है ज़िन्दगी की एक उन्नत छाया,
ज़िन्दगी सुनसान है
माँ से है सारी खुशी,
माँ बिन संसार का सब सुख है खोया।

माँ है एक उत्तम और पूर्ण दर्शन,
नहीं कभी होता है माँ का आकर्षण
माँ है सर्वत्र पूजनीय यहां,
धरती पर है माँ जैसे एक पवित्र आत्मा यहां।

माँ है तो संसार है सुन्दर,
नहीं तो फिर सब संसार है सूना
जल बिन दिखेगा जैसे यहां समुद्र,
हर खुशी से सूना कोना-कोना।

माँ है समस्त जगत में शोभित,
अवतरित सबसे बड़ी अवतार।
हम सबकी हैं एक देवी जैसे,
माता कहलाती बनकर एक अपूर्व उपहार॥

परिचय-पटना(बिहार) में निवासरत डॉ.अशोक कुमार शर्मा कविता,लेख,लघुकथा व बाल कहानी लिखते हैं। आप डॉ.अशोक के नाम से रचना कर्म में सक्रिय हैं। शिक्षा एम.काम.,एम.ए.(राजनीति शास्त्र,अर्थशास्त्र, हिंदी,इतिहास,लोक प्रशासन एवं ग्रामीण विकास) सहित एलएलबी,एलएलएम,सीएआईआईबी, एमबीए व पीएच-डी.(रांची) है। अपर आयुक्त (प्रशासन)पद से सेवानिवृत्त डॉ. शर्मा द्वारा लिखित अनेक लघुकथा और कविता संग्रह प्रकाशित हुए हैं,जिसमें-क्षितिज,गुलदस्ता, रजनीगंधा (लघुकथा संग्रह) आदि है। अमलतास,शेफालीका,गुलमोहर, चंद्रमलिका,नीलकमल एवं अपराजिता (लघुकथा संग्रह) आदि प्रकाशन में है। ऐसे ही ५ बाल कहानी (पक्षियों की एकता की शक्ति,चिंटू लोमड़ी की चालाकी एवं रियान कौवा की झूठी चाल आदि) प्रकाशित हो चुकी है। आपने सम्मान के रूप में अंतराष्ट्रीय हिंदी साहित्य मंच द्वारा काव्य क्षेत्र में तीसरा,लेखन क्षेत्र में प्रथम,पांचवां,आठवां स्थान प्राप्त किया है। प्रदेश एवं राष्ट्रीय स्तर के अखबारों में आपकी रचनाएं प्रकाशित हुई हैं।

 

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