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मेरा हमसफ़र

कपिल कुमार जैन 
भीलवाड़ा(राजस्थान)
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बारिश में न रात
जल्दी आ जाया करती है,
आफिस से घर लौटते वक़्त
अँधेरा हो जाता है।
सड़क पर चारों तरफ भीड़…
ट्रैफिक का शोर…,
तकरीबन पन्द्रह मिनट लगते हैं
रास्ता तय करने में…
कोई है ! जो मेरा
हमसफ़र बनता है इस बीच।
कल देखा था आसमां पर,
जब पीले-पीले बदन पर
लाल साफा बाँध कर आया था
बस! देखा किये उसे हम।
रास्तेभर लुका-छिपी चली हमारी,
बैरी इमारतें बीच में आ जाती हैं हमारे
रोज़ घर तक पहुंचा जाता है हमको,
फिर हम मुस्कुरा कर
जुदा होते हैं एक-दूजे से।
जीवन की उहा-पोह में…
हमनवां के साथ,
गुज़रे वो पन्द्रह मिनट
कुछ अरमां,कुछ सपने
दे जाते हैं
जो ऊर्जा बन पूरे दिन
साथ रहते हैं,
और फिर
नज़्म बन कागज़ पर
छा जाते हैं।
सुनो चाँद! कल ना…
काला टीका लगा कर आना,
सरेआम तुझसे
मोहब्बत का
इकरार किया है हमने,
डर है ज़माने की
नज़र न लग जाए॥

परिचय-कपिल कुमार जैन की जन्म तारीख १२ जनवरी १९८८ और जन्म स्थान-टोडारायसिंह(टोंक)है। वर्तमान में राजस्थान राज्य के भीलवाड़ा में स्थाई रुप से बसे हुए हैं। श्री जैन को भाषा ज्ञान-हिन्दी,इंग्लिश,संस्कृत एवं मारवाड़ी का है। राजस्थान वासी कपिल जैन ने स्नातक(वाणिज्य) की शिक्षा प्राप्त की है। इनका कार्यक्षेत्र- नौकरी(खरीदी प्रबंधक)है। सामाजिक गतिविधि के अंतर्गत संस्था से जुड़े होकर समाजसेवा करते हैं। लेखन विधा-काव्य (अतुकांत कविता)है। प्रकाशन के तौर पर किताब(कवि हम तुम)आ चुकी है तो ऑनलाइन पत्रिका में रचनाएं प्रकाशित हुई हैं। आपको लेखन के लिए प्रकाशन से सम्मान-पत्र मिल चुके हैं। श्री जैन की लेखनी का उद्देश्य-आत्म सन्तुष्टि है। इनके पसंदीदा लेखक-मुंशी प्रेमचंद,पाब्लो नेरूदा,ओशो तथा दिनकर विशेष हैं। प्रेरणा पुंज-ओशो हैं। इनकी विशेषज्ञता-अतुकांत कविता लेखन में है।

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