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मेरे भाग्य विधाता शिक्षक

हरिहर सिंह चौहान
इन्दौर (मध्यप्रदेश )
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मेरे भाग्य विधाता… (शिक्षक दिवस विशेष)…

हमें अपने हाथों से लिखना सिखाते हैं,
शब्दों की ‘पहचान’ बताते हैं
विद्या के सागर को समझते हैं,
शिक्षक ही है जो हमें ‘संवारते’ हैं 
तभी तो वह ‘भाग्य विधाता’ कहलाते हैं।

शिक्षा की ‘ज्योति’ के इस प्रकाश को,
हम ‘नादान’ बच्चों तक पहुंचाते हैं
ज्ञान के दीप को जलाते हुए,
इन शिक्षकों का कर्म ही महान होता है,
तभी तो वह ‘भाग्य विधाता’ कहलाते हैं।

बिन गुरु के ज्ञान ‘अधूरा’ ही रहता है,
अज्ञानता के ‘अंधेरे’ में ज्ञान का उजाला फैलाते हैं।
शिक्षक ही ले जाते हैं हमारा हाथ पकड़ कर,
क्योंकि वह ही ‘भाग्य विधाता’ कहलाते हैं…॥