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मैं काशी हूँ…

ममता तिवारी ‘ममता’
जांजगीर-चाम्पा(छत्तीसगढ़)
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मैं काशी हूँ, आर्यावर्त की प्रथम नगरी,
गिनती में त्रेता युग से पावन सप्त पूरी।

स्थापित हूँ अडिग निरंतर स्थिर अस्तित्व लिए,
तीनों युग की आयु अब कलयुग में भी ठहरी।

गंगा अवतरण से पहले भी थी घट-घट में,
नहीं घाट बना, तब भी गूंजा सदा बम लहरी।

मैं मात्र नगरी नहीं, पृष्ठ श्रेष्ठ सभ्यता हूँ,
आतताईयों की भी चोट सही मैं गहरी।

सुनती युगों नाद ब्रिजघण्ट शंख डमरू,
अब कुछ सौ सालों से सुन रही हूँ सँग सहरी।

कितने ही नृप महीप राज पाठ आये गये,
मुझे प्रतीक्षा, जो हो मेरा सच्चा प्रहरी।

शव को चादर चढ़ाने वाले शिव क्या जानें,
मैं अमृत उड़ेल विष पीने वाले की भँवरी॥

परिचय–ममता तिवारी का जन्म १अक्टूबर १९६८ को हुआ है। वर्तमान में आप छत्तीसगढ़ स्थित बी.डी. महन्त उपनगर (जिला जांजगीर-चाम्पा)में निवासरत हैं। हिन्दी भाषा का ज्ञान रखने वाली श्रीमती तिवारी एम.ए. तक शिक्षित होकर समाज में जिलाध्यक्ष हैं। इनकी लेखन विधा-काव्य(कविता ,छंद,ग़ज़ल) है। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में आपकी रचनाएं प्रकाशित हैं। पुरस्कार की बात की जाए तो प्रांतीय समाज सम्मेलन में सम्मान,ऑनलाइन स्पर्धाओं में प्रशस्ति-पत्र आदि हासिल किए हैं। ममता तिवारी की लेखनी का उद्देश्य अपने समय का सदुपयोग और लेखन शौक को पूरा करना है।

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