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यकृत का बचाव बहुत जरुरी

डॉ.अरविन्द जैन
भोपाल(मध्यप्रदेश)
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वर्ल्ड हेपेटाइटिस दिवस(२८ जुलाई) विशेष…

दुनिया में हर ३० सेकंड में १ मृत्यु हेपेटाइटिस वायरल के कारण होती है। इसलिए इस गंभीर बीमारी से बचाव बहुत जरुरी है। मई २०१० में ६३ वीं विश्व स्वास्थ्य सभा के दौरान २८ जुलाई को 'बिश्व हेपेटाइटिस दिवस' के रूप में राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय जागरूकता बढ़ाने के प्रयासों के प्राथमिक ध्यान के लिए मनाए जाने के उद्देश्य को वैश्विक समर्थन मिला। २८ जुलाई की तारीख नोबेल पुरस्कार विजेता और हेपेटाइटिस बी के खोजकर्ता बरूच सैमयूल ब्लूमबर्ग के सम्मान में उनके जन्मदिन के दिन की वजह से रखी गई। यह  दिन हर साल इसके बारे में जागरूकता बढ़ाने, वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या के रूप में हेपेटाइटिस की अधिक समझ प्रदान करने और बीमारी के निवारक-नियंत्रण के उपायों को मजबूत करने के प्रयासों को प्रोत्साहित करने के लिए मनाया जाता है।
  हेपेटाइटिस से यकृत में सूजन हो जाती है, जो गंभीर बीमारी और हेपोटोसेलुलर कैंसर का कारण बन सकती है। यह यकृत की सूजन आमतौर पर वायरल संक्रमण के कारण होती है। मुख्य तौर पर हेपेटाइटिस के ५ प्रकार हैं, पर वर्तमान में केवल हेपेटाइटिस ए, बी और इ के लिए ही टीके मौजूद हैं।
विभिन्न हेपेटाइटिस विषाणु अलग-अलग प्रकार से प्रसारित होते हैं, जैसे हेपेटाइटिस ए दूषित पानी और भोजन से फैलता है, तो बी रक्त और शारीरिक तरल पदार्थों से फैलता है।
   दुनियाभर में साल में लगभग १४ लाख लोगों की मृत्यु हेपे. बी और सी के कारण होती है। दो-तिहाई यकृत कैंसर का कारण भी बी-सी ही होते हैं। इसलिए यह समझना कि बी का टीका मौजूद है और सी जैसी बीमारी का अच्छा उपचार उपलब्ध है, घातक साबित हो सकता है। इस बीमारी को पूरी तरह ख़त्म करना संभव है पर इसके लिए अधिक जागरूकता के साथ अधिक लोगों की जांच और इलाज होना चाहिए।

इसके बचाव और इलाज़ में आंवला बहुत उपयोगी है, क्योंकि विटामिन ‘सी’ से भरपूर होता है। इसमें पाए जाने वाले एंटी-ऑक्सीडेंट हमारे शरीर से टॉक्सिन को हटाने में मदद करते हैं। आंवले के प्रयोग से प्रतिरोधकता बढ़े व पाचन शक्ति मजबूत हो, इसके लिए कच्चे आंवले को छोटे-छोटे टुकड़ों में काट सलाद में मिलाकर खा सकते हैं या पीस कर दही में मिलाकर रायता भी बना सकते हैं। शरबत व चटनी के रूप में भी खा सकते हैं।
ऐसे ही मुलेठी पाउडर और शहद के इस्तेमाल से भी हेपेटाइटिस सी की बीमारी को दूर किया जा सकता है। एक बड़ा चम्मच मुलेठी चूर्ण में २ चम्मच शहद मिलाकर प्रतिदिन खाएं, साथ ही लिकोरिस की जड़ को पानी में उबालकर चाय भी बनाई जा सकती है।
हल्दी को भी एक बेहद शक्तिशाली एंटी-ऑक्सीडेंट माना जाता है। इसे खाना बनाते वक्त मसालों के साथ मिलाकर खाएं या दूध में चुटकीभर हल्दी मिलाकर रोज पिएं। इससे निश्चित रूप से काफी लाभ मिलेगा। काली गाजर के भी बहुत फायदे हैं। विटामिन से भरपूर काली गाजर से खून की कमी पूरी होती है तथा रक्त संचार सुधरता है। गाजर को सलाद के रूप में खाने से बहुत फायदे होते हैं। हरी चाय, लहसुन के अलावा कुमारी आसव, आरोग्यवर्धिनी पुनर्नवादि क्वाथ आदि भी लाभकारी हैं।

परिचय- डॉ.अरविन्द जैन का जन्म १४ मार्च १९५१ को हुआ है। वर्तमान में आप होशंगाबाद रोड भोपाल में रहते हैं। मध्यप्रदेश के राजाओं वाले शहर भोपाल निवासी डॉ.जैन की शिक्षा बीएएमएस(स्वर्ण पदक ) एम.ए.एम.एस. है। कार्य क्षेत्र में आप सेवानिवृत्त उप संचालक(आयुर्वेद)हैं। सामाजिक गतिविधियों में शाकाहार परिषद् के वर्ष १९८५ से संस्थापक हैं। साथ ही एनआईएमए और हिंदी भवन,हिंदी साहित्य अकादमी सहित कई संस्थाओं से जुड़े हुए हैं। आपकी लेखन विधा-उपन्यास, स्तम्भ तथा लेख की है। प्रकाशन में आपके खाते में-आनंद,कही अनकही,चार इमली,चौपाल तथा चतुर्भुज आदि हैं। बतौर पुरस्कार लगभग १२ सम्मान-तुलसी साहित्य अकादमी,श्री अम्बिकाप्रसाद दिव्य,वरिष्ठ साहित्कार,उत्कृष्ट चिकित्सक,पूर्वोत्तर साहित्य अकादमी आदि हैं। आपके लेखन का उद्देश्य-अपनी अभिव्यक्ति द्वारा सामाजिक चेतना लाना और आत्म संतुष्टि है।