कुल पृष्ठ दर्शन : 303

You are currently viewing युगद्रष्टा रवींद्र

युगद्रष्टा रवींद्र

नमिता घोष
बिलासपुर (छत्तीसगढ़)
****************************************

भारतीय संस्कृति चेतना के संवाहक गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर को उनकी १६२वीं जन्म जयन्ती पर भावनात्मक श्र्द्धा निवेदन।
‘आमार सोनार बांग्ला आमी तोमाये भालो बासी, चिरोदिन तोमार आकाश, तोमार वातास आमार प्राने बजाये बाशी… ‘ से लेकर ‘जनगण मन अधिनायक जय हे भारत भाग्य विधाता’ हमारे राष्ट्रगीत के रचयिता को देश से लेकर अंतराष्ट्रीय स्तर तक नई पहचान दिलाने वाले साहित्य में पहले नोबेल पुरस्कार (गीतांजलि) विजेता गुरुदेव रविन्द्रनाथ टैगोर ने २ देशों के राष्ट्र गान को अपनी कलम से संवारा है। रविन्द्रनाथ का जन्म ७ मई १८६१ को कोलकाता के जोराशाको में हुआ था। रविन्द्रनाथ टैगोर न केवल कवि थे, अपितु संगीतकार, चित्रकार, दार्शनिक, कथाकार, उपन्यासकार, महान शिक्षक, तथा भारतीय सांस्कृतिक चेतना में नई जान फूंकने वाले युगदृष्टा पुरुष थे। उनके व्यक्तिगत जीवन में हिस्से में ३ जमींदारी भी आती थी, परंतु उन्होंने कभी ऐशो-आराम नहीं चाहा। तभी उन सब भौतिक सुखों से दूर शांति निकेतन जैसे अनूठे गुरुकुल एवं अद्वितीय शिक्षा पद्धति को प्रतिष्ठित किया, जो आज भी प्रासंगिक है। इसमें विज्ञान, कला-दर्शन एवं साहित्य का समावेश रहा। प्रकृति से गहरा सरोकार रखते हुए पौधों के संरक्षण से लेकर अपनी बुद्धि एवं सौन्दर्य बोध से काष्ठ निर्मित वस्तु और हस्त शिल्प के अभ्यास से रोजगारोन्मुख शिक्षा तक दी जाती है। विश्वविख्यात महाकाव्य ‘गीतांजलि’ की रचना के लिए उन्हें १९१३ में सम्मानित किया गया। वे एशिया के प्रथम नोबेल पुरस्कार विजेता रहे। रविन्द्रनाथ ने सदैव मानवता को राष्ट्रवाद से ऊंचा रखा। उनकी राष्ट्रीयता, देशभक्ति, सांस्कृतिक विचारों की अदला-बदली और तर्कशक्ति अलग विचार रखती थे। हर विषय में उनका दृष्टिकोण परम्परावादी कम तर्कसंगत ज्यादा रहा। रविन्द्रनाथ भारत के उन दैदीप्यमान नक्षत्रों में से एक है, जिसने भारत के चेहरों को पढ़ने का प्रयास किया। आपने भारत की वेदों-उपनिषदों की म्रियमाण संस्कृति को नवीन जीवन और चेतना देकर अंतराष्ट्रीय प्रांगण में खड़ा किया। गुरुदेव ने कला को सौंदर्य का बोध दिया, जिन्होंने सौंदर्य को गति दी और गति को शिव तक पहुंचाया।
रविन्द्रनाथ ने उपन्यास सहित करीब २०६२ कविता रची। गुरुदेव ७ अगस्त १९४१ को अपने दार्शनिक विचारों में लीन रहते हुए ब्रम्ह में विलीन हो गए।

परिचय-नमिता घोष की शैक्षणिक योग्यता एम.ए.(अर्थशास्त्र),विशारद (संस्कृत)व बी.एड. है। २५ अगस्त को संसार में आई श्रीमती घोष की उपलब्धि सुदीर्घ समय से शिक्षकीय कार्य(शिक्षा विभाग)के साथ सामाजिक दायित्वों एवं लेखन कार्य में अपने को नियोजित करना है। इनकी कविताएं-लेख सतत प्रकाशित होते रहते हैं। बंगला,हिन्दी एवं अंग्रेजी भाषा में भी प्रकाशित काव्य संकलन (आकाश मेरा लक्ष्य घर मेरा सत्य)काफी प्रशंसित रहे हैं। इसके लिए आपको विशेष सम्मान से सम्मानित किया गया,जबकि उल्लेखनीय सम्मान अकादमी अवार्ड (पश्चिम बंगाल),छत्तीसगढ़ बंगला अकादमी, मध्यप्रदेश बंगला अकादमी एवं अखिल भारतीय नाट्य उतसव में श्रेष्ठ अभिनय के लिए है। काव्य लेखन पर अनेक बार श्रेष्ठ सम्मान मिला है। कई सामाजिक साहित्यिक एवं संस्था के महत्वपूर्ण पद पर कार्यरत नमिता घोष ‘राष्ट्र प्रेरणा अवार्ड- २०२०’ से भी विभूषित हुई हैं।

Leave a Reply