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रिश्तों की फुलवारी में काँटे

ताराचन्द वर्मा ‘डाबला’
अलवर(राजस्थान)
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क्रूर नियति ने किस्मत में मेरी,
संन्यास लिखा है
जीवन के पन्नों पर दुःख भरा,
इतिहास लिखा है।

अपनों ने ही अपनों के संग,
खिलवाड़ किया है
मन के पृष्ठों पर मर्म स्पंदन,
संत्रास लिखा है।

मन मंदिर में महका करती,
अपनों की खुशबू
लेकिन किस्मत ने शायद अब,
वनवास लिखा है।

काँटे नज़र आने लगे हैं रिश्तों की,
फुलवारी में
हृदय में अपनेपन का खण्डित,
विश्वास लिखा है।

तन्हाई का आलम हृदय तल को,
कचोटता है
मन के मंदिर में अब विश्वासों का,
हृास लिखा है।

स्वार्थ के वशीभूत जीना अब,
आम हो गया है।
जीवन के खण्ड काव्य में विरहदग्ध,
उच्छवास लिखा है॥

परिचय- ताराचंद वर्मा का निवास अलवर (राजस्थान) में है। साहित्यिक क्षेत्र में ‘डाबला’ उपनाम से प्रसिद्ध श्री वर्मा पेशे से शिक्षक हैं। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में कहानी,कविताएं एवं आलेख प्रकाशित हो चुके हैं। आप सतत लेखन में सक्रिय हैं।