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रहिए मौन

उमेशचन्द यादव
बलिया (उत्तरप्रदेश) 
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यह दुनिया है अवसरवादी,किसको समझाए कौन,
तू-तू,मैं-मैं से भला है,लगभग रहिए मौन।

मौन बनाए बिगड़े काम,समझदारी से मिले आराम,
सद्विचार से काम करें तो,सदा सहायक बनते राम।

मौन बड़ी शक्ति का नाम,इसे स्वयं अपनाए राम,
हिंसक भी अहिंसक बन गए,जहां गए हमारे राम।

मौन से मुसीबत टलती,शांति भावना मन में चलती,
मौका ना मिले तो बैरी की,टोली हरदम हाथ मलती।

शांति से बल बढ़े सवैया,कभी ना होता पौन,
कहे ‘उमेश’ सोच-समझ कर,हो सके तो रहिए मौन।

उमेश की लेखनी वैसे चलती,जैसे चलता है पौन,
स्वार्थी सब खड़े कतार में,यहाँ है अपना कौन।

ताकत होती मौन में तो,घातक भी है मौन,
चीरहरण हुआ द्रोपदी का तो,भीष्म बैठे थे मौन।

कृष्ण अगर चुप हो जाते तो,धर्म बचाता कौन,
महाभारत के युद्ध में माधव को,मन भाया ना मौन।

कहे उमेश कि सुनो हे संतों,यहाँ अपना-पराया कौन,
होता देख अधर्म समाज में,तोड़ दो तुम भी मौन।

मर्यादा में रहकर के भाई,करो काम रोकेगा कौन,
अगर न्याय और भलाई हो तो,तुम भी हो जाओ मौन॥

परिचय–उमेशचन्द यादव की जन्मतिथि २ अगस्त १९८५ और जन्म स्थान चकरा कोल्हुवाँ(वीरपुरा)जिला बलिया है। उत्तर प्रदेश राज्य के निवासी श्री यादव की शैक्षिक योग्यता एम.ए. एवं बी.एड. है। आपका कार्यक्षेत्र-शिक्षण है। आप कविता,लेख एवं कहानी लेखन करते हैं।अलकनंदा साहित्य सम्मान,गुलमोहर साहित्य सम्मान आदि प्राप्त करने वाले श्री यादव की पुस्तक ‘नकली मुस्कान'(कविता एवं कहानी संग्रह) प्रकाशित हो चुकी है। इनकी प्रसिद्ध कृतियों में -नकली मुस्कान,बरगद बाबा,नया बरगद बूढ़े साधु बाबा,हम तो शिक्षक हैं जी और गर्मी आई है आदि प्रमुख (पद्य एवं गद्य)हैं। आपके लेखन का उद्देश्य-सामाजिक जागरूकता फैलाना,हिंदी भाषा का विकास और प्रचार-प्रसार करना है।

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