कुल पृष्ठ दर्शन : 14

लें संकल्प होकर निडर

आचार्य संजय सिंह ‘चन्दन’
धनबाद (झारखंड )
***************************************************

‘स्वागत, संकल्प, संघर्ष और सफलता’ (नववर्ष २०२६ विशेष)…

स्वागत है नव वर्ष तुम्हारा है स्वागत,
खुशियों से नववर्ष तुम्हारा आव- भगत
कहता बारम्बार नया वर्ष हो शरणागत,
सब मिल यूँ खुशी से कर लो ये स्वागत।

पर्यटन, पिकनिक, पार्टी जैसे चहल-पहल,
होटल, शहर, नगर में सब दिखते रंग महल
कश्मीर, हिमाचल, देहरादून, हो जैसे राजमहल,
वादियों में मस्ती करते जन-जीवन रहे टहल
ठंडक, शीतलहर में घूम रहा है मनवा मचल-मचल।

नये वर्ष में लें संकल्प, होकर पूर्ण निडर,
लक्ष्य साधने की कोशिश से है क्यों डर ?
चिंता, चिंतन में अब न बिताओ उमर,
दृढ़ संकल्पों से सिद्ध हुई है सभी डगर।

संकल्पों को साध्य बनाएँ सब घर-घर,
उठें, बढ़ें, लड़ें, पढ़ें, साधक बनें जो है बेघर
जीवन में कुछ काम कर, कुछ भी तो कर,
संकल्पों में जान फूँक के हो जा तू अमर।

सच्चाई पर चलना है जी बहुत कठिन,
संघर्षों में खुद हो जाओ पूर्ण विलीन
सत्य मार्ग पर चलते चलते हो जा लीन,
असत्यता की गुंजाइश को करो मलिन।

क्यों खुद को समझे तुम हो दीन-हीन,
संघर्षों का तेरे अंदर भरा है अद्भुत जीन
संघर्षों से भागने वाले हैं अस्तित्व हीन,
संघर्ष से डरने वाले राही होते मार्ग विहीन।

संघर्ष ही सफलता की जननी है,
सफलता के लिए संघर्ष करनी है,
जीवन एक संघर्ष, सफलता वैतरणी है,
लक्ष्य, धैर्य, विश्वास हमारी दुःखहरणी है।

स्वयं में हो दृढ़ विश्वास सफलता आनी है,
इस नए वर्ष पर आस, हो खास सफलता पानी है।
संघर्ष के बिना सफलता की गुंजाईश बेमानी है,
सफलता ही खुशियाँ, जीवन की ज़िंदगानी है॥

परिचय-सिंदरी (धनबाद, झारखंड) में १४ दिसम्बर १९६४ को जन्मे आचार्य संजय सिंह का वर्तमान बसेरा सबलपुर (धनबाद) और स्थाई बक्सर (बिहार) में है। लेखन में ‘चन्दन’ नाम से पहचान रखने वाले संजय सिंह को भोजपुरी, संस्कृत, हिन्दी, खोरठा, बांग्ला, बनारसी सहित अंग्रेजी भाषा का भी ज्ञान है। इनकी शिक्षा-बीएस-सी, एमबीए (पावर प्रबंधन), डिप्लोमा (इलेक्ट्रिकल) व नेशनल अप्रेंटिसशिप (इंस्ट्रूमेंटेशन डिसिप्लिन) है। अवकाश प्राप्त (महाप्रबंधक) होकर आप सामाजिक कार्यकर्ता व रक्तदाता हैं तो साहित्यिक गतिविधि में भी सक्रियता से राष्ट्रीय संस्थापक-सामाजिक साहित्यिक जागरुकता मंच मुंबई (पंजी.), संस्थापक-संरक्षक-तानराज संगीत विद्यापीठ (नोएडा) एवं राष्ट्रीय प्रवक्ता के.सी.एन. क्लब (मुम्बई) सहित अन्य संस्थाओं से बतौर पदाधिकारी जुड़े हैं, साथ ही पत्रकारिता का वर्षों का अनुभव है। आपकी लेखन विधा-गीत, कविता, कहानी, लघु कथा व लेख है। बहुत-सी रचनाएँ पत्र-पत्रिका में प्रकाशित हैं, साथ ही रचनाएँ ४ साझा संग्रह में हैं। ‘स्वर संग्राम’ (५१ कविताएँ) पुस्तक भी प्रकाशित है। सम्मान-पुरस्कार में आपको महात्मा बुद्ध सम्मान-२०२३, शब्द श्री सम्मान-२०२३, पर्यावरण रक्षक सम्मान-२०२३, श्रेष्ठ कवि सम्मान-२०२३ सहित अन्य मिले हैं तो विशेष उपलब्धि-राष्ट्रीय कवि सम्मेलन में कई बार उपस्थिति, देश के नामचीन स्मृति शेष कवियों (मुंशी प्रेमचंद, जयशंकर प्रसाद, भारतेंदु हरिश्चंद्र आदि) के जन्म स्थान जाकर उनकी पांडुलिपि अंश प्राप्त करना है। श्री सिंह की लेखनी का उद्देश्य-हिन्दी भाषा का उत्थान, राष्ट्रीय विचारों को जगाना, हिन्दी भाषा, राष्ट्र भाषा के साथ वास्तविक राजभाषा का दर्जा पाए, गरीबों की वेदना, संवेदना और अन्याय व भ्रष्टाचार पर प्रहार करना है। मुंशी प्रेमचंद, अटल बिहारी वाजपेयी, जयशंकर प्रसाद, भारतेंदु हरिश्चंद्र, महादेवी वर्मा, रामधारी सिंह दिनकर, किशन चंदर और पं. दीनदयाल उपाध्याय को पसंदीदा हिन्दी लेखक मानने वाले ‘चंदन’ के लिए प्रेरणापुंज-पूज्य पिता जी, नेताजी सुभाष चन्द्र बोस, महात्मा गॉंधी, भगत सिंह, लोकनायक जय प्रकाश, बाला साहेब ठाकरे और डॉ. हेडगेवार हैं। आपकी विशेषज्ञता-साहित्य (काव्य), मंच संचालन और वक्ता की है। जीवन लक्ष्य-ईमानदारी, राष्ट्र भक्ति, अन्याय पर हर स्तर से प्रहार है। देश और हिंदी भाषा के प्रति विचार-“अपने ही देश में पराई है हिन्दी, अंग्रेजी से अंतिम लड़ाई है हिन्दी, अंग्रेजी ने तलवे दबाई है हिन्दी, मेरे ही दिल की अंगड़ाई है हिन्दी।”