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वक़्त की नजाकत

ताराचन्द वर्मा ‘डाबला’
अलवर(राजस्थान)
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वक़्त की नजाकत को,
समझना होगा
सम्भल-सम्भल कर,
कदम बढ़ाना होगा।

कष्ट भी आएंगे जीवन में,
फूट-फूट कर रुलाएंगे
वक़्त के ज़ख्मों पर,
मरहम लगाना होगा।

विश्वास नहीं करना,
किस्मत की लकीरों पर
मंजिल अगर पानी है,
ये भ्रम मिटाना होगा।

आजकल रिश्तों में,
खटास आने लगी है
निज स्वार्थ को छोड़कर,
प्रेम जगाना होगा।

मतलब परस्त है लोग,
स्वार्थ में जीते हैं
दिल में छाया अंधकार,
अब मिटाना होगा।

लोगों के दिल में क्या है,
पता नहीं चलता
दिल में छिपा हर राज,
अब बताना होगा।

छल कपट ईर्ष्या द्वेष,
लोगों पर भारी हो गए।
मानवता का पाठ,
अब पढ़ाना होगा॥

परिचय- ताराचंद वर्मा का निवास अलवर (राजस्थान) में है। साहित्यिक क्षेत्र में ‘डाबला’ उपनाम से प्रसिद्ध श्री वर्मा पेशे से शिक्षक हैं। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में कहानी,कविताएं एवं आलेख प्रकाशित हो चुके हैं। आप सतत लेखन में सक्रिय हैं।

 

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