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वर दायिनी माँ

सरोजिनी चौधरी
जबलपुर (मध्यप्रदेश)
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ज़िंदगी एक वसंत… (वसंत पंचमी विशेष)…

अधर मधुर मुख-मंडल सुंदर
मंद-मंद मुस्कान झरे,
जग तारिणी हे वर दायिनी!
जन-जन में नव प्राण भरे।

श्वेत कमल पर आन विराजी
भक्तों के सब कष्ट हरे,
ज्ञान-दीप की ज्योति जला कर
सकल जगत आलोक करे।

माँ की अनुकम्पा से जग में
राष्ट्र-प्रेम उर प्यार सजे,
शारद वीणा झंकारों से
वंदे मातरम् गान बजे।

श्वेत सुशोभित कमल विराजे
विश्वाराध्या मातृ भजें,
शुभ वाणी की धार बहे माँ
कंठे मुक्ता हार सजे।

शरण तिहारी खड़े भक्त सब
जय जय जय जयकार करें,
भेदभाव का तम हट जाए,
रचना में उल्लास भरें॥