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वे भी जीते हैं

सच्चिदानंद किरण
भागलपुर (बिहार)
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कभी बातें तो हो,
झुग्गी-झोपड़ी वालों के संग
उनकी दुःख-तकलीफों में
सांझा करने के लिए
वे भी जीते हैं,
अपने बाल-गोपाल संग
परिवार की खुशियों में,
पुराने फटे चीथड़ों से बनी
बड़ी-बड़ी कंपनियों के,
प्रचारी रंग-बिरंगी रैग्जीन पर्दों से
ढके-ढकाए
घनघोर बरसात,
व बर्फीले मौसम में।

वो पोशाक जिसमें संस्कारी,
सभ्यता की कोई परख‌
ही नहीं होती,
शान से जीते हैं आवारा कुत्तों
और सुअरों के संग,
मर्द-औरतों की आपसी बातों में
अपट-सपट‌ के लहजों से,
कूड़े-कबाड़ों बीच बसती है
उनकी जिंदगी नंग-धड़ंग,
लिबासों में ठन-ठनाठन
रातें गुजरती गहरी नींद में,
सिरहाने होते ईंट-पत्थरों के
ढेर तकिए में।

कूड़े-कबाड़े में खोजते,
अपने भाग्य की तस्वीर
कहीं मिल जाए तकदीर,
सड़ी-गली-छिपी गंदी पड़ी
नालों में भीड़ लगी सड़क किनारे,
शहर के ऊँचे खड़े महलों के
नीचे सूर्य के प्रकाश में।

जिंदगी दरिद्रता की हो,
या अमीर खानदानों की।
पर जी रहा वो भी,
जिंदगी शौक-अरमानों की
भले ही जेब खाली है,
टकसाल वालों की अपेक्षा
वह मुझ-सा मानव देव-सा है,
समृद्धशील देश के वासी बन।

इंसान के इंसान हैं,
हैवानियत भी कमजोर नहीं
पक्की बातों की करते हैं नौकरी,
मालिक-सेवक की हैसियत से
दूर फरेबी नहीं,
‘वो भी जीते हैं’
जरा उनकी भी बातें हो।
हम सबके बीच,
पर्दानसीब हो॥

परिचय- सच्चिदानंद साह का साहित्यिक नाम ‘सच्चिदानंद किरण’ है। जन्म ६ फरवरी १९५९ को ग्राम-पैन (भागलपुर) में हुआ है। बिहार वासी श्री साह ने इंटरमीडिएट की शिक्षा प्राप्त की है। आपके साहित्यिक खाते में प्रकाशित पुस्तकों में ‘पंछी आकाश के’, ‘रवि की छवि’ व ‘चंद्रमुखी’ (कविता संग्रह) है। सम्मान में रेलवे मालदा मंडल से राजभाषा से २ सम्मान, विक्रमशिला हिंदी विद्यापीठ (२०१८) से ‘कवि शिरोमणि’, २०१९ में विक्रमशिला हिंदी विद्यापीठ प्रादेशिक शाखा मुंबई से ‘साहित्य रत्न’, २०२० में अंतर्राष्ट्रीय तथागत सृजन सम्मान सहित हिंदी भाषा साहित्य परिषद खगड़िया कैलाश झा किंकर स्मृति सम्मान, तुलसी साहित्य अकादमी (भोपाल) से तुलसी सम्मान, २०२१ में गोरक्ष शक्तिधाम सेवार्थ फाउंडेशन (उज्जैन) से ‘काव्य भूषण’ आदि सम्मान मिले हैं। उपलब्धि देखें तो चित्रकारी करते हैं। आप विक्रमशिला हिंदी विद्यापीठ केंद्रीय कार्यकारिणी समिति के सदस्य होने के साथ ही तुलसी साहित्य अकादमी के जिलाध्यक्ष एवं कई साहित्यिक मंच से सक्रियता से जुड़े हुए हैं।

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