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शिक्षक अगर ना होते तो…

उमेशचन्द यादव
बलिया (उत्तरप्रदेश) 
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यदि आप नहीं होते तो…(शिक्षक दिवस विशेष)…

शिक्षक तो भाग्य विधाता हैं, इनसे अटूट मेरा नाता है,
इस धरती पर सुखमय स्वर्ग बने, शिक्षक की यही अभिलाषा है।

शिक्षक ही तो वह दीपक है, जग रोशन हेतु जल जाते हैं,
गला फाड़ चिल्लाते खूब, हम पर ओ ज्ञान लुटाते हैं।

अपने ज्ञान की बारिश कर, हमको वो अमीर बनाते हैं,
सच्चे समाज की रचना में, वे भूमिका अहम् निभाते हैं।

शिक्षक होते हैं कलाकार, मानव को इंसान बनाते हैं,
हम सबको उत्तीर्ण करके वे, खुद वहीं रह जाते हैं।

शिक्षा ऐसी जड़ी-बूटी है, पीते ही चढ़ जाती है,
शिक्षक की महिमा बनी रहे तो, कीर्ति अमर बन जाती है।

शिक्षक अगर ना होते तो, धरा रसातल को जाती,
मानव से मानवता की आशा, सदा के लिए सो जाती।

हे गुरुदेव, यदि आप न होते, मैं भी नहीं अब लिख पाता,
दर-दर की मैं ठोकर खाता, थक कर मैं भी सो जाता।

आप दिखाई राह जगत की, चलना उस पर आजमाता हूँ,
हरदम आपका ध्यान मैं करता, जब भी कभी लड़खड़ाता हूँ।

कहे ‘उमेश’ शिक्षक की महिमा, अपरम्पार निराली है,
जिनके ज्ञान की ज्योति से, यह दुनिया जगमग सारी है॥

परिचय–उमेशचन्द यादव की जन्मतिथि २ अगस्त १९८५ और जन्म स्थान चकरा कोल्हुवाँ(वीरपुरा)जिला बलिया है। उत्तर प्रदेश राज्य के निवासी श्री यादव की शैक्षिक योग्यता एम.ए. एवं बी.एड. है। आपका कार्यक्षेत्र-शिक्षण है। आप कविता,लेख एवं कहानी लेखन करते हैं। लेखन का उद्देश्य-सामाजिक जागरूकता फैलाना,हिंदी भाषा का विकास और प्रचार-प्रसार करना है।