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संरक्षण करना है प्रकृति का

श्रीमती देवंती देवी
धनबाद (झारखंड)
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भाग्यशाली हैं भारतीय, विश्व ही हम सबका घर है,
विश्व का हर एक दिवस, हम सबका का महापर्व है।

ईश्वर का बनाया हुआ, आज यह पावन दिवस है,
आज शुभ विश्व प्रकृति संरक्षण का शुभ दिवस है।

अपनी पावन पुण्य वसुन्धरा में हम वृक्ष लगाएंगे,
भारतीय प्रकृति दिवस, सभी मिलकर मनाएंगे।

धरा में प्रकृति का जो नियम है, उसको अपनाएंगे,
प्रकृति संरक्षण के लिए, एक-दूजे का हाथ बटाएंगे।

विश्व प्रकृति से हम सभी को, ऊर्जा मिलती है,
यह प्रकृति की देन है, ऋतु हमेशा बदलते रहती है।

प्रकृति का संरक्षण, मन-कर्म से मैं हमेशा करुॅ॑गी,
प्रकृति से सुख मिलता है, मैं तो सत्य ही कहूँगी।

आए इस जमीं पर, सौभाग्य है हम भारतीयों का,
बचाएं वसुन्धरा को, संरक्षण करना है प्रकृति का।

आओ मिल के करें प्रतिज्ञा, विश्व दिवस मनाने की,
हम भारतीय कहलाते हैं, आदत है धर्म निभाने की॥

परिचय– श्रीमती देवंती देवी का ताल्लुक वर्तमान में स्थाई रुप से झारखण्ड से है,पर जन्म बिहार राज्य में हुआ है। २ अक्टूबर को संसार में आई धनबाद वासी श्रीमती देवंती देवी को हिन्दी-भोजपुरी भाषा का ज्ञान है। मैट्रिक तक शिक्षित होकर सामाजिक कार्यों में सतत सक्रिय हैं। आपने अनेक गाँवों में जाकर महिलाओं को प्रशिक्षण दिया है। दहेज प्रथा रोकने के लिए उसके विरोध में जनसंपर्क करते हुए बहुत जगह प्रौढ़ शिक्षा दी। अनेक महिलाओं को शिक्षित कर चुकी देवंती देवी को कविता,दोहा लिखना अति प्रिय है,तो गीत गाना भी अति प्रिय है |